नई दिल्ली:– गर्दन में अकड़न और पीठ, हाथ, या पैरों में होने वाले दर्द के पीछे गर्दन की दबी हुई नस भी एक कारण हो सकती है। इस स्थिति को सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी कहते हैं। यह समस्या तब होती है, जब गर्दन के आसपास के टिश्यूज के दबाव से नसें उत्तेजित या संकुचित हो जाती हैं। इसी कारण से दर्द, झुनझुनी, कमजोरी और सुन्नता महसूस होती है।
गर्दन में दबी हुई नस के लक्षण
गर्दन, पीठ, हाथ और पैरों में हल्का या तेज दर्द
झुनझुनी या जलन
हाथ, बाजू या पैरों में सही से रिस्पॉन्स न मिलना
मांसपेशियों में थकावट
सुन्नता (Numbness)
क्या है इस समस्या का निदान
डॉक्टर आमतौर पर गर्दन, कंधे और हाथों की शारीरिक जांच करते हैं। इसके लिए कुछ स्पेशल टेस्ट्स किए जाते हैं, जो निम्न है-
स्पर्लिंग टेस्ट
मरीज की गर्दन को प्रभावित क्षेत्र की ओर झुकाकर और सिर पर ऊपर से नीचे तक हल्का दबाव डालकर लक्षणों का पता लगाया जाता है।
एक्स-रे
गर्दन के रीढ़ की एक्स-रे किया जाता है, जिससे दबी हुई नस का पता चलता है।
सीटी स्कैन
यह रीढ़ और हड्डियों की डिटेल में स्कैनिंग करके बीमारी का पता लगाने की कोशिश की जाती है।
एमआरआई स्कैन
इससे रीढ़, नसों और डिस्क के डिटेल चित्र मिलते हैं।
इलेक्ट्रोमायोग्राफी
यह टेस्ट नसों में इलेक्ट्रिक संकेतों की गति को मापता है और दबी हुई नस का पता लगाने में मदद करता है।
गर्दन की नस दबने का कारण
उम्र संबंधी समस्या
भारी वजन उठाना
लगातार कंपन करने वाले मशीनों का उपयोग
गोल्फ खेलना
गोताखोरी
क्या है इसका इलाज
अगर 5-6 सप्ताह में पर्याप्त आराम के बावजूद भी समस्या में आराम नहीं मिलता है, तो डॉक्टर से संपर्क करना ही उचित होता है।
आइस और हीट थेरेपी
गर्म और ठंडे आइस पैक से प्रभावित जगह की सेंकाई करने से भी सूजन कम होती है और दर्द से राहत मिलती है।
फिजिकल थेरेपी
गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करने और लचीलापन बढ़ाने के लिए एक्सरसाइज या फिजियोथेरेपी करे।
अच्छा पॉश्चर
सही तरीके से बैठने और खड़े रहने से दबाव कम होता है।
मालिश
रक्त प्रवाह में सुधार और मांसपेशियों की जकड़न कम करने में मालिश असरदार है, लेकिन इसे किसी प्रोफेशनल से ही कराना चाहिए।
नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डिकम्प्रेशन ट्रीटमेंट
यह नस पर दबाव को कम करता है और नैसर्गिक उपचार प्रक्रिया को तेज करता है। अन्य उपचारों के मुकाबले नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डिकम्प्रेशन ट्रीटमेंट से लॉन्ग टाइम के लिए रिलीफ मिलता है।
