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    एक्यूप्रेशर और एक्यूपंक्चर में क्या है अंतर, दर्द हो जाएगा गायब, यहां जाने दोनों के बारे में पूरी जानकारी…

    By Tv 36 HindustanNovember 26, 2024No Comments11 Mins Read
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    ?सिर दर्द, कमर दर्द, पैर या पेट दर्द..दर्द तो हर किसी की जिंदगी में रोजाना होता ही है और हम लपक के एक गोली खाकर काम पर चल पड़ते हैं लेकिन ये सब हथेलियों को दबाने से ठीक हो जाता है और इस हुनर का नाम है एक्यूप्रेशर.हाथों से दूर हो जाती है बीमारी..क्या हर दर्द मिटा सकता है एक्यूप्रेशर और एक्यूपंक्चर?

    उर्मिला के सिर में दो दिन से दर्द था, दवाई भी खाई लेकिन रह-रह कर सिर का दर्द आ ही जाता था. ऑफिस में ही रमेश ने उसकी हथेलियों के कुछ पॉइंट्स को दबाया और मेथी के दाने कान के एक पॉइंट पर टेप से बांध कर दबाए तो उर्मिला का सिर दर्द गायब हो गया. रमेश ने बताया, उसने कोई जादू नहीं किया, ये एक्यूप्रेशर का कमाल है जो उसने सीखा है.एक्यूप्रेशर क्या है?महर्षि राजेश योगी बताते हैं, जिस तरह से घरों में लाइट ऊपर लगी होती है और उसके स्विच नीचे होते हैं उसी तरह से हमारे शरीर का भी स्ट्रक्चर होता है. हमारे शरीर के कुछ ऐसे पॉइंट्स होते हैं जो हमारे फेफड़ों और शरीर के कई अंगों से जुड़े होते हैं जो नर्व के माध्यम से कनेक्ट करते हैं. उन पॉइंट्स को दबाकर ऑक्सीजन सर्कुलेशन को बढ़ाया जाता है, जिससे एनर्जी ब्लॉकेज या फिर ब्लड का ब्लॉकेज खत्म हो जाता है. इसे ही एक्यूप्रेशर कहते

    एक्यूप्रेशर के पॉइंट्सपतंजलि योगग्राम में मेडिकल अफसर डॉ अजीत राणा बताते हैं, अगर किसी के सिर में दर्द हो रहा है तो उसके कई कारण हो सकते हैं. किसी को ज्यादा ट्रैवलिंग तो किसी को डिप्रेशन की वजह से भी हो सकता है. हमें नहीं पता होता है कि क्या ट्रीटमेंट करना चाहिए. अगर किसी को दिक्क्त हो रही तो उसमें हाथ के अंगूठे पर दबाव दिया जाता है. उसको तीन से चार मिनट के लिए दबाकर रखना होता है. इसके बाद धीरे-धीरे समय बढ़ाते रहते हैं. इससे सिर दर्द में आराम होने लगता है. इसी तरह अंगूठे और बीच वाली उंगली मिड पॉइंट है, अगर आप वहां दबाव डालेंगे तो आपको थोड़ा भारीपन सा महसूस होगा. ये एक्यूपंक्चर पॉइंट है, जो सिर दर्द के लिए दिया जाता है. जिस तरह योग में प्राण को बहुत महत्व दिया जाता है, उसी तरह इस पारंपरिक उपचार एक्यूप्रेशर में जीवन ऊर्जा को सबसे अहम माना जाता है.

    शरीर की पूरी एनर्जी हथेली, तलवे और कान पर इंडिकेट करती है. उसके स्पेसिफिक पॉइंट को प्रेस करने से कई तरह के दर्द से आराम मिल जाता है. डॉ अजीत राणा कहते हैं, एक्यूप्रेशर किसी भी बीमारी के लिए एक सपोर्टिव ट्रीटमेंट है. ये किसी भी चीज का कंप्लीट ट्रीटमेंट नहीं है क्योंकि उसका कारण कुछ और होगा लेकिन कुछ समय के लिए आपको इससे आराम मिल जाएगा. ये एक भारतीय चिकित्सा ही है जिसका आयुर्वेद में जिक्र है. लेकिन इसे भारत में भुला दिया गया. चीन में इसको बहुत महत्व दिया गया और इस पर काफी रिसर्च की गई, प्रमोट किया गया. एक्यूपंक्चर को चीन में ही सबसे ज्यादा ग्रोथ मिली.

    क्यों बजवाई जाती है ताली?कई बार योग करते समय योगाचार्य आपसे ताली बजवाते हैं. उसके पीछे का कारण भी एक्यूप्रेशर के पॉइंट एक्टिव करना ही है. डॉ अजीत राणा बताते हैं, पहले लोगों को इसलिए ही पैदल चलने के लिए कहा जाता था क्योंकि जब आप पैदल चलते हैं तो जितने भी एक्यूप्रेशर पॉइंट होते हैं, उन पर दबाव पड़ता है. यहां तक कि पहले जब टीचर बच्चों के कान खींचते थे, तब भी एक्यूप्रेशर के पॉइंट एक्टिव हो जाते थे. समय के साथ अब सब कुछ बदल गया है. इसी तरह अब एक सीडिंग प्रोसेस भी आ गया है. इसमें सीड्स और मैग्नेट का इस्तेमाल होता है. अगर किसी को पीठ में दर्द हो रहा है तो उसमें मेथी सीड्स लिया जाता है, उसको टेप पर लगा करके स्पेसिफिक एरिया पर चिपका देते हैं. उसको बीच-बीच में प्रेस किया जाता है. इसी तरह अगर किसी की स्पाइन में दर्द रहता है तो चने का इस्तेमाल किया जाता है.

    दर्द खींचता है मैग्नेटसीडिंग प्रोसेस में मैग्नेट का भी इस्तेमाल होता है. साउथ और नॉर्थ पॉल के मैग्नेट होते हैं जिसमें एक पॉजिटिव और दूसरा नेगेटिव होता है. जब मैग्नेट इस्तेमाल किया जाता है तो किसी एक पॉइंट से एनर्जी को दूसरे पॉइंट तक पहुंचाया जाता है. अगर किसी के सिर में दर्द हो रहा है तो एक पॉइंट को सिर पर और एक पॉइंट को बैक पर लगाया जाता है. एनर्जी को बैलेंस किया जाता

    हर उम्र के लोगों को दिया जा सकता है एक्यूप्रेशरएक्यूपंक्चर में नीडल का इस्तेमाल होता है और नीडल की वजह से कई तरह की समस्या भी हो सकती है. इसमें हाइजीन को लेकर भी कई बार सवाल उठते रहे हैं. ये भी डर रहता है कि कहीं कोई इस्तेमाल की हुई नीडल ना लगा दे. ऐसे में एक्यूप्रेशर बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक को दिया जा सकता है.कहां काम करता है एक्यूप्रेशरये नर्व, टिशू और मसल्स पर काम करता है. ये वात, पित्त और कफ में अपने पॉइंट्स का डिवीजन करता है. इसमें या तो एनर्जी को जनरेट किया जाता है या एनर्जी ज्यादा होती है तो उसे ड्रेन कराया जाता है. अगर कोई एंजायटी या डिप्रेशन से पीड़ित है तो फेशियल टिशूज के स्पेसिफिक पॉइंट पर उसको रिलैक्स कराया जाता है. इसमें फेस पर कई पॉइंट होते हैं. वहां पर लाइट मसाज देकर उनके टिशूज और मसल्स को आराम दिया जाता है.

    एक्यूप्रेशर के जानकार महर्षि राजेश बताते हैं, हर बीमारी के लिए एक्यूप्रेशर दिया जा सकता है. कैंसर में भी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए एक्यूप्रेशर दिया जाता है. वो बहुत हेल्पफुल होता है. हार्ट ब्लॉकेज में भी एक्यूप्रेशर का सहारा लिया जाता है.मर्म चिकित्सा से अलग है एक्यूप्रेशरमर्म चिकित्सा में केवल शरीर के सबसे सेंसेटिव पॉइंट्स लिए गए हैं. उन पर बहुत हल्के प्रेशर के साथ चिकित्सा दी जाती है. एक्यूप्रेशर में थोड़ा ज्यादा प्रेशर दिया जाता है. उसमें एक स्पेसिफिक जगह को 30 से 40 बार दबाया जाता है. जबकि एक्यूपंक्चर में नीडल के जरिए पंच किया जाता है.

    एक्यूप्रेशर करने वाले की योग्यताएक्यूप्रेशर करने वाला व्यक्ति कहीं किसी संस्था से सर्टिफाइड होना चाहिए. जिसने एक्यूप्रेशर के बारे में सही जानकारी हासिल की हो. उसने पढ़ाई करते हुए एक्यूप्रेशर के महत्व को अपने जीवन में समझा हो. किसी योग केंद्र पर जाकर आप एक्यूप्रेशर सीख सकते हैं. कई जगहों पर 2 महीने से लेकर 3 महीने तक का कोर्स होता है. एक्यूप्रेशर और एक्यूपंक्चर दोनों के ही शॉर्ट टर्म कोर्स होते हैं

    .एक्यूपंक्चरक्या आपको पता है, आपने कान में जो बाली पहनी है या आपकी नाक की नथ, ये सब एक्यूपंक्चर का काम करती हैं, एक्यूपंक्चर के जानकार ऐसा मानते हैं. डॉ राजेश महर्षि कहते हैं, महिलाओं का कान छेदना या नाक छेदना, एक्यूपंक्चर की ही विधि थी. पहले पुरुषों को भी कान में कुंडल पहनाया जाता था. इसके पीछे का कारण है कि हमारे जो पैट्रियोटिक ग्रंथि है और ब्रेन के न्यूरॉन्स हैं, उसमें ऑक्सीजन का फ्लो अच्छा रहता है. मस्तिष्क के हार्मोन में भी बहुत ज्यादा लाभ होता है. कान में ही महिलाओं को अलग जगह पर कुंडल पहनाया जाता था और पुरुषों को अलग जगह पर कुंडल पहनाया जाता था. पुरुषों को हर्निया की दिक्कत हो जाती थी तो पुरुषों के कान में एक्यूपंक्चर करके ही ठीक किया जाता था.

    डॉ अजीत राणा कहते हैं, एक्यूपंक्चर का इस्तेमाल स्किन और मसल्स की सेंसिबल नर्व्स को एक्टिव करने के लिए किया जाता है. ये टीसीएम (ट्रेडिशनल चाइनीस मेडिसिन) के अंतर्गत आता है. चीन के लोग ये मानते हैं करीब 3000 साल पहले उनके पूर्वजों ने इसकी खोज की और बताया कि एक्यूपंक्चर एक थेरेपी है, इस पर लोगों को कैसे विश्वास करना चाहिए. वो किसी भी तेज पत्थर और हड्डियों का इस्तेमाल एक्यूपंक्चर को स्टिमुलेशन के लिए उपयोग करते

    एक्यूपंक्चर क्या है?हमारी शरीर में बहुत सारे पॉइंट्स होते हैं. अगर उन पॉइंट्स पर स्टिमुलेशन करते हैं तो उसमें एक एनर्जी रिलीज होती है. जिससे अगर उसमें कोई समस्या होगी तो वो धीरे-धीरे ठीक हो जाएगी. उनको एक्यू पॉइंट कहा जाता है. शरीर में बहुत सारे मेरिडियन (मेरिडियन चैनल होता है) होते हैं, हर प्रॉब्लम का एक अलग मेरिडियन होता है. उन पॉइंट के कॉन्बिनेशन से जो ट्रीट किया जाता है, उसको हम एक्यूपंक्चर बोलते हैं.एक्यूपंक्चर का प्रॉसेसइंसान की बॉडी में एनर्जी होती है, जिसे चीन की भाषा में ची कहा जाता है. जब भी किसी अंग पर एनर्जी इफेक्ट होती है, वो बॉडी का पूरा मेकैनिज्म डिस्टर्ब कर देती है. अगर शरीर में कहीं पर सूजन ज्यादा है तो इससे समझ में आता है कि वहां फ्लो ऑफ एनर्जी बहुत ज्यादा है.

    उसके लिए एक्यूपंक्चर नीडल से एनर्जी को बैलेंस किया जाता है. जो इंसान के CNS यानी सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर डायरेक्ट इफेक्ट करता है. जब भी नीडल किसी एक पॉइंट पर लगाई जाएगी, उस समय शरीर का इम्यून सिस्टम एग्रीगेट करेगा. इसके बाद वह जैसे-जैसे प्रोसेसिंग में आएगा, वैसे-वैसे ही वो चीजों को हील करेगा.

    एक्यूपंक्चर से किन बीमारियों का इलाज होता है?एक्यूपंक्चर एक बहुत ही आम कॉम्प्लीमेंटरी थेरैपी है, जिससे कई तरह की समस्याओं में निजात मिलती है. इससे पुराने से पुराने दर्द, माइग्रेन, कमर दर्द, ऑस्टियोआर्थराइटिस, पेरिफेरल न्यूरोपैथी और सिरदर्द जैसी कई समस्या में राहत मिलती है. ब्रेन रिलेटेड डिसऑर्डर के लिए भी एक्यूपंक्चर लिया जाता

    नीडल्स किस तरीके के होते हैं?एक्यूपंक्चर के लिए इस्तेमाल की जाने वाली नीडल्स बहुत पतली होती हैं. इसमें नीडल्स अलग-अलग तरीके की होती हैं. जिनके नाम 0.5 नीडल, 7 स्टार नीडल, 1.5 नीडल होते हैं. हर नीडल का अपना एक स्पेसिफिक काम होता है. 0.5 और 1.5 नीडल का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है. ब्रेन रिलेटेड जितने भी डिसऑर्डर होते हैं, उनके लिए ज्यादातर स्कैल्प नीडलिंग का इस्तेमाल किया जाता है. अगर किसी को एंजायटी या डिप्रेशन है, उसके लिए अलग-अलग पॉइंट होते हैं. जिससे उसकी एनर्जी को न्यूट्रल किया जाता है.

    कहां-कहां पर दे सकते हैं नीडल?बॉडी में अलग-अलग मेरिडियन होते हैं. जिस तरीके से जब पाइप से पानी भरा जाता है और अचानक से मोटर बंद हो जाती है तो पाइप में एयर का एक बबल बन जाता है. उसमें जब पानी का प्रेशर बढ़ता है तो बबल निकल जाता है. वरना हवा पानी को दो हिस्सों में बांट देती है. इसी तरह से इंसान का जो नर्व सिस्टम है, उसमें कहीं ना कहीं एनर्जी ब्लॉक हो जाती है. ऐसे में जब वहां स्टिमुलेशन किया जाता है तो वहां पर एनर्जी बढ़ जाती है, ब्लॉकेज खत्म हो जाता है.एक्यूपंक्चर फेमस होने का किस्साचीन में बहुत समय से इसकी प्रैक्टिस चल रही थी. इस बीच 1972 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन चीन दौरे पर गए थे. वहां पर उनको दर्द हुआ तो उनका इलाज एक्यूपंक्चर से किया गया. जिससे उन्हें काफी आराम हुआ. उससे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर रेस्टन भी चीन यात्रा पर गए थे, उन्होंने भी अपना एक्सपीरियंस लिखा. इस तरह को लेकर लोगों के बीच समझ बढ़ी और लोग दर्द कम करने के लिए इस पद्धति का भी इस्तेमाल करने लगे

    .एक्यूपंक्चर में ही हैं एडिशनल थेरेपीकुछ लोगों को नीडल से डर लगता है, ऐसे में एक्यूपंक्चर में ही कई एडिशनल थेरेपी भी हैं. जिसमें रिफ्लेक्सीलॉजी, एक्यूप्रेशर, सूजोक होता है. उनके अलग-अलग जगह पर अलग-अलग नाम होते हैं.सुजोक चिकित्सा क्या है?सुजोक चीन का का एक शब्द है, जो एक्यूप्रेशर में ही आता है. सुजोक चिकित्सा के अंदर ही करीब 27 से ज्यादा थेरेपी मौजूद हैं. सुजोक में मुख्य रूप से एक्यूप्रेशर, सुजोक एक्यू पंक्चर, रंगों के साथ थेरेपी, अनाज के बीजों, चुंबक और स्माइल थेरेपी के जरिए इलाज किया जाता है.किन बिमारियों पर इफेक्टिव है सुजोक थेरपी?सुजोक चिकित्सा में बीपी, सिरदर्द, पैरालिसिस, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, गैस्ट्रिक एसिडिटी, अल्सर, कब्ज, माइग्रेन, सिर का चक्कर, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, गैस्ट्रो इसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज, डिस्क प्रोलैप्स और कीमोथेरेपी जैसी कई समस्याओं का इलाज किया जाता है. इससे फोबिया, तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्या से भी राहत मिलती है.रिफ्लेक्सोलॉजीइसके बारे में साल 1970 में डॉ विलियम फिट्ज़गेराल्ड ने लिखा था कि कैसे शरीर के अलग-अलग जोन होते हैं.

    रिफ्लेक्सोलॉजी में कान, हाथ और पैर के रिफ्लेक्स पॉइंट्स पर मसाज की जाती है. उसमें बॉडी के पूरे पार्ट इंडिकेट होते हैं. इस थेरेपी में एक्यूप्रेशर पॉइंट दबते हैं, जिसके कारण ब्रेन को दर्द कम महसूस होता है और दिमाग को शांति मिलती है. इससे हमारा स्ट्रेस दूर हो जाता है और शरीर को एनर्जी मिलने लगती है. इंसान का अंगूठा सिर की तरह काम करता है, इंडेक्स फिंगर और लिटिल फिंगर वार्म अप करने का काम करती हैं. हथेली वाला हिस्सा लीवर और पेट का काम करता है. इसी तरह यहां पर तलवे में भी बॉडी के कई पार्ट्स को इंडिकेट करता है.

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