छत्तीसगढ़:– RTI यानी सूचना के अधिकार के तहत CCTV फुटेज मांगने वालों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल RTI आवेदन के आधार पर CCTV फुटेज आवेदक को सीधे उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। अदालत के मुताबिक CCTV रिकॉर्डिंग में संवेदनशील जानकारी हो सकती है, इसलिए इसे RTI के जरिए सीधे साझा करने पर रोक लागू हो सकती है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई व्यक्ति अपनी शिकायत लेकर उचित कोर्ट या सक्षम आयोग के सामने जाता है, तो संबंधित फोरम CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दे सकता है। जरूरत पड़ने पर शिकायत की जांच के लिए फुटेज को तलब भी किया जा सकता है।
किस मामले में आया हाईकोर्ट का आदेश?
यह आदेश जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभ्देश कुमार चौधरी की बेंच ने शोभित कश्यप की ओर से दायर रिट याचिका का निपटारा करते हुए दिया।
मामले में याचिकाकर्ता ने 20 मार्च 2025 को RTI आवेदन दाखिल कर कई जानकारियां मांगी थीं। इनमें संबंधित CCTV फुटेज भी शामिल थी। उनका आरोप था कि मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारी पर अधिकतम 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने और कथित परेशानी के लिए मुआवजा देने की मांग भी की थी।
RTI के जरिए CCTV फुटेज क्यों नहीं दी गई?
सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयोग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि CCTV फुटेज में ऐसी संवेदनशील जानकारी हो सकती है, जिसका सीधे खुलासा करना उचित नहीं है। आयोग ने RTI एक्ट की धारा 8(1)(g) का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में CCTV फुटेज आवेदक को सीधे उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि CCTV फुटेज को किसी भी परिस्थिति में हासिल नहीं किया जा सकता। आयोग के मुताबिक, कोर्ट या सक्षम फोरम के निर्देश पर संबंधित फुटेज उपलब्ध कराई जा सकती है।
शिकायत होने पर क्या हो सकता है?
हाईकोर्ट ने माना कि कोर्ट या सक्षम आयोग के पास CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर उसे मंगाने का अधिकार है। यानी अगर किसी व्यक्ति का मामला किसी शिकायत, विवाद या कानूनी कार्यवाही से जुड़ा है, तो वह उचित फोरम के सामने अपनी शिकायत रख सकता है।
ऐसी स्थिति में संबंधित कोर्ट या आयोग CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दे सकता है और मामले की जांच के लिए संबंधित रिकॉर्डिंग तलब भी कर सकता है।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान शोभित कश्यप की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि CCTV फुटेज को सुरक्षित रखना नागरिक का अधिकार है।
हाईकोर्ट ने इस पहलू को स्वीकार करते हुए कहा कि संबंधित कोर्ट या आयोग CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने और उसे मंगाने का निर्देश दे सकता है। लेकिन इस मामले में याचिकाकर्ता ने अभी तक किसी उचित कोर्ट या सक्षम आयोग के सामने अपनी शिकायत दाखिल नहीं की थी।
सिर्फ RTI आवेदन के आधार पर नहीं मिलेगी फुटेज
हाईकोर्ट ने इसी आधार पर कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में CCTV फुटेज सीधे आवेदक को उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। यानी केवल RTI के माध्यम से CCTV रिकॉर्डिंग मांगना पर्याप्त नहीं है।
हालांकि, अगर याचिकाकर्ता अपनी शिकायत को उचित कोर्ट या सक्षम फोरम के सामने लेकर जाते हैं, तो वहां से CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने और वास्तविक रिकॉर्डिंग मंगाकर शिकायत की जांच करने का आदेश दिया जा सकता है।
इस फैसले से यह साफ होता है कि RTI के जरिए CCTV फुटेज मांगने और कानूनी शिकायत की जांच के लिए CCTV फुटेज हासिल करने की प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है।
