नई दिल्ली:– एक फुटबॉल ग्राउंड के आकार की लेबोरेटरी, वजन 430 टन से अधिक और धरती से लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई। 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रही इस लेबोरेटरी को हम इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन कहते हैं। 1998 में इसकी लॉन्चिंग के बाद से अब तक 26 देशों के 280 से ज्यादा एस्ट्रोनॉट ISS का दौरा कर चुके हैं।
लेकिन नासा अब इसे प्रशांत महासागर में गिराने की तैयारी कर रहा है। इसकी वजह ये है कि ISS के प्राइमरी स्ट्रक्चर जैसे मॉड्यूल, ट्रस और रेडिएटर खराब हो रहे हैं और 2030 के बाद इसका संचालन काफी जोखिम भरा व महंगा होता जाएगा। कई विकल्पों पर विचार करने के बाद इसे प्रशांत महासागर के प्वाइंट निमो में गिराने का फैसला किया गया है।
