नई दिल्ली:- हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी दिन से दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत होती है। धनतेरस पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार को अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण हर साल इस तिथि को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर क्यों प्रकट हुए थे? इसके पीछे समुद्र मंथन से जुड़ी एक खास पौराणिक कथा है।
समुद्र मंथन से हुआ था भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया था। इसका उद्देश्य अमृत प्राप्त करना और देवताओं की खोई हुई शक्ति तथा वैभव को वापस हासिल करना था। समुद्र मंथन के दौरान एक के बाद एक 14 रत्न प्रकट हुए। इन्हीं रत्नों में भगवान धन्वंतरि भी शामिल थे, जो अपने हाथों में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे।
अमृत कलश लेकर क्यों आए थे भगवान धन्वंतरि ?
धार्मिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत देवताओं को अमर, निरोगी और शक्तिशाली बनाने के लिए था। इसके सेवन से देवताओं को अपनी शक्ति वापस प्राप्त करने और असुरों से अपना राजपाट हासिल करने में सहायता मिलनी थी।
भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अंशावतार और देवताओं का वैद्य माना जाता है। उनके हाथों में मौजूद अमृत कलश स्वास्थ्य, आरोग्य और लंबी आयु का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का जनक भी कहा जाता है। भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य की कथा का उल्लेख विष्णु पुराण और अग्नि पुराण में मिलता है।
धनतेरस पर क्यों की जाती है भगवान धन्वंतरि की पूजा ?
मान्यता है कि कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से परिवार को अच्छे स्वास्थ्य, निरोगी जीवन और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
धनतेरस पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा का भी विशेष महत्व है। जहां माता लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी माना जाता है, वहीं भगवान धन्वंतरि स्वास्थ्य और आरोग्य के देवता माने जाते हैं। इसलिए इस दिन दोनों की पूजा करके लोग अपने परिवार के लिए धन-संपत्ति के साथ अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करते हैं।
