गुजरात:-बीजेपी और कांग्रेस गुजरात में चुनावी लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही होती रही है। 182 सीटों वाली गुजरात की विधानसभा में मुश्किल से पांच-छह सीटों को छोड़कर बाकी सीटें इन्हीं दो राजनीतिक दलों की झोली में जाती हैं। आम आदमी पार्टी ने साल 2017 में भी गुजरात का विधानसभा चुनाव लड़ा था हालांकि तब पार्टी ने सिर्फ 30 सीटों पर ही उम्मीदवार उतारे थे और अधिकतर सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई थी। सूरत नगर निगम की जीत लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी को उम्मीद है कि वह गुजरात में अच्छा प्रदर्शन कर सकती है।
विशेषकर शहरी इलाकों सूरत आदि में उसका संगठन जोर-शोर से चुनाव प्रचार कर रहा है। पिछले साल हुए स्थानीय निकाय के चुनाव में सूरत नगर निगम की 120 में से 27 सीटों पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली थी। अगर सोशल मीडिया और टीवी को देखें, तो ऐसा लगता है कि गुजरात में आम आदमी पार्टी और बीजेपी ही चुनावी लड़ाई में हैं। लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि कांग्रेस भले ही 1997 से गुजरात की सत्ता से बाहर है लेकिन उसे वहां हर विधानसभा चुनाव में 40 फीसद के आसपास वोट मिलते रहे हैं।
ऐसे में निश्चित रूप से भले ही कांग्रेस इतने सालों तक राज्य में सरकार ना बना सकी हो, लेकिन वह राज्य के अंदर बड़ी सियासी ताकत जरूर है। अरविंद केजरीवाल की सॉफ्ट हिंदुत्व वाली राजनीति को एक तरह से ध्वस्त करने की कोशिश की थी क्योंकि अरविंद केजरीवाल बीते कुछ सालों से लगातार मंदिर जा रहे हैं और खुद को हनुमान भक्त बताते रहे हैं। गोपाल इटालिया के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां हीरा बा को लेकर की गई टिप्पणी पर भी दिल्ली से लेकर गुजरात तक बीजेपी के कार्यकर्ता सड़क पर हैं। दिल्ली में शुक्रवार को महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने इसे लेकर जोरदार प्रदर्शन किया है। – Satya Hindiकेंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी गोपाल इटालिया की टिप्पणियों को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को निशाने पर लिया है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या बीजेपी को वाकई आम आदमी पार्टी से किसी तरह का डर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का गृह राज्य होने और 25 सालों से लगातार सत्ता में होने की वजह से यह कहना मुश्किल होगा कि गुजरात में आम आदमी पार्टी बीजेपी को सत्ता से हटाने जा रही है। लेकिन जिस तरह खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी सभाओं में गुजरात में अर्बन नक्सल का मुद्दा उठाया है उससे ऐसा जरूर लगता है कि कहीं ना कहीं बीजेपी को उसके शहरी वोटों में सेंध लगने का डर है। यहां इस बात का जिक्र करना जरूरी होगा कि आम आदमी पार्टी ने साल 2012 में अपनी स्थापना के बाद 10 सालों के भीतर ही दिल्ली और पंजाब में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बना ली है। दिल्ली में वह लगातार तीसरी बार सत्ता में आई है।हालांकि आम आदमी पार्टी ने साल 2022 के फरवरी-मार्च में हुए पांच राज्यों के चुनाव में पंजाब के साथ ही गोवा और उत्तराखंड में भी पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ा था।