नई दिल्ली। आपने महिलाओं में बांझपन के बारे में सुना है लेकिन क्या पुरुषों में बांझपन की समस्या के बारे में सुना है। जी हां आजकल पुरुष भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। पहले इस बारे में बात नहीं की जाती थी और सिर्फ महिलाओं को ही बच्चा न होने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। बल्कि अब पुरुष भी उतने ही जिम्मेदार हैं। दरअसल उनमें शुक्राणुओं की संख्या में कमी हो रही है जिसकी वजह से ही बांझपन हो रहा है।
पुरुष बांझपन आमतौर पर शुक्राणुजनन यानी स्पर्मेटोजेनेसिस की समस्याओं के कारण होता है। इसके अलावा व्यस्त जीवनशैली,धुम्रपान, शराब का सेवन हॉर्मोनल बदलाव, जेनेटिक रीजन या फिर कोई और कारण भी हो सकते हैं जो मेल इंफर्टिलिटी के लिए भी जिम्मेदार हैं।आपने स्पर्म कमजोर या फिर स्पर्म कम हैं ऐसा सुना होगा लेकिन इसके बारे में ज्यादा समझ नहीं होगी।
दरअसल, शुक्राणु (वीर्य) की कमी को तकनीकी रूप से ओलिगोस्पर्मिया के नाम से जाना जाता है, यह बीमारी पुरुषों में उप-प्रजनन या बांझपन का एक बहुत ही आम कारण है। इसलिए गर्भधारण करने में कुछ समय लग सकता है क्योंकि यह महिला साथी के अंडे को निषेचन में व्यवहार्य शुक्राणु का मौका कम कर देता है।
शुक्राणु (वीर्य) की कमी
शुक्राणुओं की कमी का अर्थ है कि यौन प्रक्रिया के दौरान पुरुषों के लिंग से निकलने वाले सीमेन में कम शुक्राणुओं का पाया जाना। कम शुक्राणुओं की समस्या यानि लो स्पर्म काउंट को ओलिगोस्पर्मिया कहते हैं। अगर किसी पुरुष के सीमेन में एक भी शुक्राणु ना मिलें तो उसे एजूस्पर्मिया कहा जाता है। मगर तब भी निराश नहीं होना चाहिए। कई लोगों में क्रयफ़ोजूस्पेर्मिया भी होता है।
शुक्राणु कम होने के लक्षण
शुक्राणु कम होने के लक्षण में सबसे मुख्य लक्षण है कि एक पुरुष बच्चे पैदा करने में असमर्थ होता है। हार्मोन में असंतुलनता,फैला हुआ टेस्टिक्युलर नस या शुक्राणु के गुजरने में बाधा उत्पन्न करने वाला एक विकार संभावित रूप से चेतावनी संकेतों का कारण बन सकता है
इलाज
कई बार लाइफस्टाइल में थोड़ा सा बदलाव, हेल्दी डाइट और डॉक्टर से बातचीत से ही काफी हद तक यह समस्या सुलझ जाती है।