छत्तीसगढ़ :– बस्तर जिले में 12 ग्रामीणों के सनातन धर्म में लौटने का मामला सामने आया है। दरभा ब्लॉक के बोदेनार पंचायत के नीलेगोंदी गांव में ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना कर अपने मूल धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने की घोषणा की।
पारंपरिक रीति-रिवाजों से हुई पूजा-अर्चना
जानकारी के अनुसार, नीलेगोंदी गांव के 12 ग्रामीण कुछ वर्ष पहले ईसाई धर्म में शामिल हुए थे। अब उन्होंने अपनी पारंपरिक मान्यताओं और सांस्कृतिक पहचान से दोबारा जुड़ने का निर्णय लिया। इसके बाद गांव में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया।
इस दौरान माटी पुजारी, पेरमा, कोटवार और पटेल सहित गांव के अन्य प्रमुख लोगों की मौजूदगी में पारंपरिक तरीके से पूजा-पाठ कराया गया। पूजा-अनुष्ठान के बाद ग्रामीणों ने सनातन परंपरा को अपनाने की बात कही।
संस्कृति और परंपरा से जुड़ने की बात
घर वापसी के दौरान ग्रामीणों ने अपनी स्थानीय संस्कृति, रीति-रिवाजों और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं से जुड़े रहने की बात कही। कार्यक्रम के बाद गांव में लोगों ने एक-दूसरे को बधाई भी दी।
बस्तर अपनी आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। ऐसे में नीलेगोंदी में हुई यह घर वापसी स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
बस्तर में धर्म परिवर्तन और घर वापसी का मुद्दा
बस्तर क्षेत्र में धर्म परिवर्तन और घर वापसी का मुद्दा समय-समय पर सामने आता रहा है। हालांकि, किसी भी धर्म से जुड़े बदलाव को लेकर स्थानीय परिस्थितियों और संबंधित लोगों के व्यक्तिगत निर्णय को समझना महत्वपूर्ण है।
नीलेगोंदी में 12 ग्रामीणों की सनातन परंपरा में वापसी को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। फिलहाल, इस मामले में किसी तरह के विवाद या दबाव की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
