नई दिल्ली:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने लगभग 20 महत्वपूर्ण समझौतों को अंतिम रूप दिया, जिनमें ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल सहयोग सबसे अधिक चर्चा में है। इन समझौतों का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना, रक्षा सहयोग बढ़ाना और आर्थिक संबंधों को नई दिशा देना है।
रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम
भारत और इंडोनेशिया के बीच हुए रक्षा समझौतों में सबसे महत्वपूर्ण फैसला स्वदेशी रक्षा तकनीक को लेकर हुआ। इंडोनेशिया ने भारत की स्वदेशी अस्त्र (Beyond Visual Range Air-to-Air Missile) प्रणाली खरीदने की मंजूरी दी। दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी। थल सेना, नौसेना और वायु सेना के संयुक्त सैन्य अभ्यासों का दायरा बढ़ाया जाएगा। समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफी और रियल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
सबांग पोर्ट बनेगा रणनीतिक केंद्र
भारत और इंडोनेशिया ने मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित सबांग डीप सी पोर्ट के संयुक्त विकास पर सहमति व्यक्त की। यह बंदरगाह हिंद महासागर और मलक्का स्ट्रेट के बीच रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे दोनों देशों के बीच समुद्री संपर्क मजबूत होगा और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।
महत्वपूर्ण खनिजों पर बढ़ेगा सहयोग
दोनों देशों ने निकल सहित कई क्रिटिकल मिनरल्स की खोज, खनन और प्रोसेसिंग में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। इसके अलावा रेयर अर्थ एलिमेंट्स, परमानेंट मैग्नेट निर्माण, स्टील सप्लाई चेन, औद्योगिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी संयुक्त कार्य होगा।
डिजिटल और तकनीकी सहयोग
भारत ने अपने डिजिटल सार्वजनिक ढांचे का अनुभव इंडोनेशिया के साथ साझा करने पर सहमति दी है। इसके अंतर्गत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल भुगतान प्रणाली, चुनावी तकनीक, कस्टमाइज्ड इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम पर तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
स्थानीय मुद्रा में व्यापार
दोनों देशों ने व्यापारिक लेन-देन में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए भारतीय रुपया (INR) और इंडोनेशियाई रुपिया (IDR) में सीधे व्यापार को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है।
अंतरिक्ष, विज्ञान और कृषि में सहयोग
भारत और इंडोनेशिया ने कई नए क्षेत्रों में भी साझेदारी मजबूत करने का फैसला किया। इनमें अंतरिक्ष अनुसंधान, सैटेलाइट डेटा साझाकरण, संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान, कृषि आधुनिकीकरण, खाद्य सुरक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य सेवाएं, ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन शामिल है।
सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंध होंगे मजबूत
दोनों देशों ने प्रम्बानन मंदिर संरक्षण, विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग, छात्र विनिमय कार्यक्रम, शोध फेलोशिप और वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी सहमति जताई है।
हवाई संपर्क को मिलेगा विस्तार
भारत और इंडोनेशिया के बीच पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए जकार्ता और बाली के लिए सीधी उड़ानों की संख्या बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।
प्रधानमंत्री मोदी को मिला सर्वोच्च नागरिक सम्मान
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंटांग आदिपूर्णा’ से सम्मानित किया। इसे दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
भारत-इंडोनेशिया समझौते की मुख्य 20 बातें
भारत-इंडोनेशिया समझौतों की मुख्य रूप से अस्त्र मिसाइल, सहयोग ब्रह्मोस मिसाइल, सहयोग, सबांग पोर्ट विकास, संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा समझौता, स्टील सप्लाई चेन, क्रिटिकल मिनरल्स, रेयर अर्थ सहयोग, चुनावी तकनीक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थानीय मुद्रा में व्यापार, अंतरिक्ष सहयोग, विज्ञान एवं अनुसंधान, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, फार्मा एवं स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा, सांस्कृतिक संरक्षण, शिक्षा एवं छात्र विनिमय साथ ही हवाई संपर्क विस्तार सर्वोच्च नागरिक सम्मान शामिल हैं ।
महत्वपूर्ण तथ्य
भारत और इंडोनेशिया द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सहयोग, व्यापार, ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों में कई समझौते किए हैं। हालांकि ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों की डिलीवरी, संख्या, तैनाती और परिचालन से जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की गई हैं। इसी तरह “दक्षिण चीन सागर में चीन को घेरने” या “मलक्का जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने की क्षमता” जैसे दावे रणनीतिक विश्लेषण का हिस्सा हैं, इन्हें आधिकारिक नीति या घोषित सैन्य योजना के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
