नई दिल्ली:- सांपों के गंध से इस खास औषधि की कहानी शुरू होती है. इस औषधि को सर्पगंधा के नाम से जानते हैं. यह औषधि तमाम गंभीर बीमारियों को जड़ से खत्म करने में कामयाब होती है. यह औषधि एक छोटे पौधे के रूप में होती है. इसके फल गुलाबी होते हैं जो पकने के बाद काले रंग में बदल जाते हैं. यह औषधि मनोरोग के लिए रामबाण होती है.
इसकी जड़ मिट्टी में काफी अंदर तक चली जाती हैं. इसकी जड़े स्वस्थ मानव जीवन के लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण होती है. इस औषधि का प्रयोग बीपी को सही रखने के लिए भी किया जाता है. इसके चूर्ण प्रयोग मानसिक विकार, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, मिर्गी, पेट में दर्द, कब्ज, पुरानी से पुरानी सांस की बीमारी और बुखार जैसी तमाम बीमारियों में बेहद लाभकारी होती है.
आयुर्वेद प्रो. डॉ. एसपी तिवारी बताते हैं कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण सर्पगंधा का पौधा है. इसका आयुर्वेद में बहुत अच्छा प्रयोग है. सर्दी, खांसी, बुखार और जुकाम में इसके जड़ का बनाया हुआ काढ़ा बहुत उपयोगी होता है.
शांति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्रो. डॉ. एसपी तिवारी ने कहा कि जो इसके काढ़े और चूर्ण का प्रयोग नहीं करना चाहते हैं वे लोग इसके टैबलेट का प्रयोग कर सकते हैं. यह कब्ज, बदहजमी, पेट की कृमि से निजात दिलाता है. अनिद्रा में बहुत अच्छा इसका उपयोग है. सर्पगंधा का प्रयोग कभी भी बिना चिकित्सक से राय लिए नहीं करना चाहिए.
यह एक बेहद लाभकारी औषधि है. लेकिन तमाम बीमारियों में इसका अलग-अलग प्रयोग भी है. इसलिए इसका सेवन उचित मात्रा में और चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही करना चाहिए. क्योंकि इसका जो सही मात्रा होता है प्रयोग करने का वह उम्र और बीमारी के हिसाब से एक चिकित्सक ही तय कर सकता है.
