: केंद्रीय मंत्री आर के सिंह ने ट्रांसपोर्ट सेक्टर को कार्बन-फ्री करने के लिए नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कोष (Additional Funds) आवंटित किए जाने का भरोसा दिया है. उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में ट्रांसपोर्ट सेक्टर के सरकारी और उद्योग हितधारकों की बैठक की अध्यक्षता की. इसमें सिंह ने ऊर्जा बदलाव की दिशा में सरकार के संकल्प को दोहराया और उत्सर्जन को कम करने में भारत की प्रतिबद्धता पर बल दिया
.सिंह ने कहा कि जरूरी होने पर सरकार नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए पहले से निर्धारित 496 करोड़ रुपये के अलावा अतिरिक्त धनराशि भी आवंटित करने के लिए तैयार होगी. उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ग्रीन हाइड्रोजन के पोटेंशियल को देखने के लिए सीरीज ऑफ ट्रायल होनी चाहिए ताकि ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल से सेक्टर को कार्बन-फ्री करने के लिए नेशनल रोडमैप बनाया जा सके.
उन्होंने कहा कि इस रोडमैप में पायलट प्रोजेक्ट्स, टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट और लोकलाइज्ड मैन्युफैक्चरिंग एंड स्केलिंग प्रोसेस के जरिये कॉस्ट को कम करने की संभावना का ब्योरा भी शामिल होना चाहिए.
क्या है नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन?नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और उसके डेरिवेटिव्स के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का ग्लोबल हब बनाना है. यह मिशन, अर्थव्यवस्था को कार्बनमुक्त बनाने, फॉसिल फ्यूल के आयात पर निर्भरता में कमी लाने और ग्रीन हाइड्रोजन के सेक्टर में टेक्नोलॉजी अपनाने तथा बाजार में नेतृत्व हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा.
