मध्यप्रदेश:- गुजरात के गिर क्षेत्र में होने वाला खास केसर आम अब मालवा की धरती में भी उगाया जा रहा है. बीते दो-तीन सालों में रतलाम के किसानों ने आम की खेती को भी अपनाया है और केसर आम के उत्पादन में यहां के किसानों को बड़ी सफलता हाथ लगी है. प्रायोगिक तौर पर की गई केसर आम की खेती यहां की जलवायु में फिट हो गई है. जिसका नतीजा यह रहा कि अब रतलाम में करीब एक दर्जन से अधिक किसानों ने केसर आम की खेती शुरू की है.
रतलाम में केसर आम की पैदावार
करमदी के शरद पाटीदार से लेकर धराड़ के अरुण पाटीदार तक रतलाम के इन युवा किसानों ने केसर आम को मालवा की धरती पर उगाने में अपना योगदान दिया है. इसके बेहतर नतीजे अब सामने आने लगे हैं. धराड़ गांव के किसान अरुण पाटीदार ने बताया “5 एकड़ के खेत में 2000 हजार आम के पौधे लगाए थे. जिसमें आधा बगीचा 10 बाय 10 और आधा बगीचा 20 बाय 20 की दूरी पर लगाए हैं. सिंचाई और फर्टिलाइजेशन की पूरी व्यवस्था ड्रिप द्वारा की गई है.
दूसरे और तीसरे साल ही इन पौधों में फल लगने लगे थे. इसके बाद अब चौथे साल यह बगीचा अच्छी बहार पर आया है. पिछले वर्ष जिन लोगों को केसर आम दिए थे. वह इस वर्ष भी केसर आम की डिमांड कर रहे हैं.” खेत पर ही बुकिंग करने पहुंचे पास के गांव के दिनेश पाटीदार ने बताया कि “फ्रेश और अच्छी क्वालिटी वाला केसर आम यही मिल रहा है. इसलिए हम केसर आम की बुकिंग खेत पर पहुंच कर ही करवा रहे हैं.”
20 किलो औसतन उत्पादन
रतलाम के रहने वाले किशोर जोशी ने भी करमदी गांव के किसानों के आम के बगीचे से केसर आम की बुकिंग एडवांस में करवाई है. अरुण पाटीदार ने बताया कि “एक पेड़ पर से करीब 20 किलो तक औसतन उत्पादन प्राप्त हो रहा है. जो मार्केट में 80 से ₹100 प्रति किलो में बिकता है. जिससे अन्य उद्यानिकी फसलों के बजाय अच्छा मुनाफा मिल रहा है.
बहरहाल अब वीएनआर जाम, अंगूर की खेती, अनार की खेती और अब आम की खेती के लिए भी मालवा के रतलाम का नाम पहचाना जा रहा है. यहां के केसर आम की महक अब मध्य प्रदेश के शहरों में ही नहीं बल्कि गुजरात के शहरों तक भी पहुंचने लगी है. वहीं, क्षेत्र के अन्य किस भी केसर आम की खेती के लिए प्रेरित हो रहे हैं.
