छत्तीसगढ़ :– जांजगीर-चाम्पा जिले के अंतिम छोर में बसे अकलतरा ब्लॉक की पिपरसत्ती गांव के महिला किसान जानकी बाई यादव, सोनारीन,यादव, अमरीका बाई, यादव, ने कमाई का बड़ा जरिया बना दिया है. ऑर्गेनिक खेती और देसी गाय पालन को अपनाया. आज वे देसी गायों के गोबर से बने उपले और कंडे ऑफलाइन बेचकर लाखों रुपये कमा रहे हैं, खासकर गर्मी और बरसात के सीजन में उनकी डिमांड तेजी से बढ़ गई है।
किसान के लिए हर संसाधन की अपनी कीमत होती है,बस जरूरत है उसे सही तरीके से पहचानने और उपयोग करने की. जांजगीर-चाम्पा जिले के अंतिम छोर में बसे छोटे से पिपरसत्ती गांव महिला किसानों ने यही कर दिखाया है. पशुपालन करके न ऑर्गेनिक खेती और देसी गाय पालन को अपनाया. आज वे देसी गायों के गोबर से बने उपले और कंडे बेचकर लाखों की कमाई कर रहे हैं।
सोनारीन यादव ने बताया की दूध से ज्यादा कमाई गोबर से
सिर्फ दूध बेचकर ही नहीं, बल्कि गायों के गोबर से ज्यादा आय अर्जित कर रही हैं.वे देसी गायों के गोबर से छोटे-छोटे उपले और कंडे बनाकर उन्हें माला के रूप में तैयार करते हैं. करीब 350 ग्राम वजन की 20-21 उपलों की एक माला 290 रुपये में बिकती है. यानी जिस गोबर को आमतौर पर बेकार समझा जाता है, वही उनके लिए ‘सोना’ साबित हो रहा है।
गोबर के कंडे की डिमांड जबरदस्त है…
जानकी बाई यादव,ने बताई पहले पशुपालन उनके पूर्वजों द्वारा की जा रही थी,लेकिन पहलें हम केवल दूध बेचकर ही जीवन यापन करते, हमने सोचा की क्यों न गोबर के कंडे बेचकर दोहरा आमदनी कमाई जाय, जिस उम्मीद से हमने गोबर के कंडे बनाने शुरुआत की वास्तविक में हमने पहले की प्रयास में सफलता हासिल की प्रथम साल में हमने लगभग एक लाख से ऊपर की कंडे बेचकर आमदनी अर्जित की लेकिन आज गर्मी और बरसात के सीजन में मांग इतनी ज्यादा है कि ऑर्डर पूरे करना मुश्किल होता है, क्योंकि बरसात में सूखे लकड़ी मिलना बहुत मुश्किल होता है, कंडे बिक्री की बात करे तो बिलासपुर जिले से सबसे अधिक डिमांड आती है।
