नई दिल्ली:– अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के एक बयान ने इटली की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। ट्रंप द्वारा इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni की आलोचना के बाद इटली में सत्ता और विपक्ष दोनों एक मंच पर नजर आए। इटली की संसद में नेता प्रतिपक्ष Elly Schlein ने ट्रंप को कड़े शब्दों में जवाब देते हुए कहा कि “कोई भी विदेशी नेता हमारे देश का अपमान नहीं कर सकता।”
एली श्लेन का संसद में तीखा भाषण
डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता एली श्लेन ने संसद में कहा कि भले ही वे प्रधानमंत्री मेलोनी की राजनीतिक विरोधी हैं, लेकिन देश के सम्मान पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “सुन लो ट्रंप, हम राजनीतिक विरोधी हो सकते हैं, लेकिन हम सभी इटली के नागरिक हैं। किसी भी विदेशी को हमारे देश का अपमान करने का अधिकार नहीं है।” उनके इस बयान पर संसद में जोरदार तालियां बजीं और सभी दलों के सांसदों ने समर्थन जताया।
ट्रंप ने मेलोनी पर क्या कहा था?
दरअसल, ट्रंप ने एक इंटरव्यू में मेलोनी की आलोचना करते हुए कहा था कि वह ईरान के खिलाफ सख्त रुख नहीं अपना रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मेलोनी NATO और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रही हैं। ट्रंप ने कहा, “मुझे लगा था कि उनमें हिम्मत है, लेकिन मैं गलत था।”
ईरान मुद्दे ने बढ़ाया विवाद
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि मेलोनी ईरान के परमाणु खतरे को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। उनके अनुसार, यह वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। इस बयान के बाद इटली में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और विपक्ष ने इसे देश के सम्मान पर हमला बताया।
इटली में दिखी दुर्लभ एकजुटता
ट्रंप के बयान के बाद इटली की राजनीति में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। आमतौर पर आमने-सामने रहने वाले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने देश के सम्मान के मुद्दे पर एकजुटता दिखाई। एली श्लेन ने संसद में कहा कि, “इटली एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है। हमारा संविधान युद्ध का विरोध करता है और हम किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे।”
अमेरिका-इटली संबंधों में दरार?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद से अमेरिका और इटली के संबंधों में तनाव आ सकता है। एक समय ट्रंप और मेलोनी के बीच अच्छे संबंध माने जाते थे, लेकिन हालिया बयानबाजी ने इस रिश्ते में खटास ला दी है। डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने इटली में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे खास बात यह रही कि देश के सम्मान के मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष एक साथ खड़े नजर आए।
