छत्तीसगढ़:– ये खूबसूरती के लिए जाना जाता है. इसकी पहचान देश-दुनिया में सिर्फ खूबसूरती से ही नहीं बल्कि यहां पर बोली जाने वाली भाषाओं से भी होती है. क्या आप जानते हैं छत्तीसगढ़ में कितनी भाषाएं बोली जाती हैं. आइए आपको बताते हैं कि यहां पर सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा कौन सी है. इसके अलावा, आदिवासियों की भाषा के बारे में भी बताते हैं.
बैसे तो छत्तीसगढ़ में 90 से ज्यादा बोलियां बोली जाती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं, कि छत्तीसगढ़ की लोकल भाषा कौन सी है. यहां के लोग सबसे ज्यादा किस भाषा में बात करते हैं. आइए आपको यहां की भाषाओं के बारे में बताते हैं.
बता दें कि प्रदेश के कई इलाकों में हिंदी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, जो देश के हर कोने में बोली जाती है. लेकिन छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पहचान यहां की मीठी और सरल भाषा छत्तीसगढ़ी भाषा है. यहां पर रहने वाले लोग छत्तीसगढ़ी भाषा में सबसे ज्यादा बात करते हैं.
छत्तीसगढ़ी भाषा एक इंडो-आर्यन भाषा है, इसकी पहचान आर्य भाषाओं से जुड़ी है. यह न सिर्फ राज्य में सबसे अधिक बोली जाती है, बल्कि इसकी अपनी एक समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा भी है, जो इसे और भी खास बनाती है.
छत्तीसगढ़ी भाषा, प्रदेश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है. यह भाषा लोगों के दिल में एक खास स्थान रखती है. छत्तीसगढ़ी भाषा प्रदेश में अलग ही पहचान दिलाती है. इस भाषा में सिर्फ बातचीत का नजरिया नहीं है, बल्कि यहां के लोकगीतों, कहानियों और सांस्कृतिक परंपराओं की आत्मा है. इसकी ध्वनियों में यहां की मिट्टी की सुगंध और लोगों का अपना महसूस होता है.
बता दें कि छत्तीसगढ़ में हिंदी भाषा भी बड़े पैमाने पर बोली जाती है. यह छत्तीसगढ़ की आधिकारिक भाषाओं में से एक है. इसका उपयोग मुख्य रूप से प्रशासनिक और सरकारी कार्यों के लिए किया जाता है.
छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा कलंगा, सादरी, कोरवा, भुलिया, खैरागढ़ी, बैगानी और कावर्डी और सुरगुजिया भाषा का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में बोली जाने वाली गोंडी भाषा को आदिवासी समुदायों में सबसे ज्यादा बोली जाती है. गोंडी भाषा को आदिवासी भाषा के नाम से भी जाना जाता है.
