मध्य प्रदेश:- उज्जैन जिले में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां जोरों शोरों पर चल रही हैं. वहीं प्रशासन की तरफ से 37 किमी स्नान कॉरिडोर डेवलप किया जा रहा है. वहीं लगभग 5 करोड़ श्रद्धालुओं की सुविधाओं का निरीक्षण किया गया.
धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां अब तेजी से जमीन पर की जा रही हैं. करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासनिक अमला लगातार सुबह घाटों पर पहुंचकर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटा है. आज सुबह 6 बजे से आशीष सिंह और रोशन कुमार सिंह के नेतृत्व में 30 से अधिक अधिकारियों की टीम ने शनि मंदिर से वाकणकर ब्रिज तक करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र का पैदल निरीक्षण किया. इस दौरान क्षिप्रा नदी के नवनिर्मित घाटों, एंट्री-एग्जिट सिस्टम, पार्किंग प्लान और श्रद्धालुओं के मूवमेंट रूट का बारीकी से अध्ययन किया गया.
मेला अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि सिंहस्थ 2028 के लिए करीब 29 किलोमीटर लंबे नए घाट विकसित किए जा रहे हैं. पुराने 9 किलोमीटर घाटों को जोड़कर कुल 37 किलोमीटर का विशाल स्नान क्षेत्र तैयार होगा. प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि श्रद्धालु किस पॉइंट से प्रवेश करेंगे, घाटों तक कैसे पहुंचेंगे और किस मार्ग से सुरक्षित बाहर निकलेंगे. उन्होंने बताया कि हर 200 मीटर पर व्यवस्थाओं की मैपिंग की जा रही है. घाटों की लंबाई-चौड़ाई, ऊंचाई-निचाई, ड्रेनेज सिस्टम और पहुंच मार्गों की स्थिति का मौके पर परीक्षण किया जा रहा है.
श्रद्धालुओं के लिए होगी सुविधाएं
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो. इसी के तहत प्रशासन वाहन पार्किंग से लेकर घाटों तक श्रद्धालुओं की आवाजाही का पूरा प्लान तैयार कर रहा है. पार्किंग स्थल, एंट्री-एग्जिट गेट और सर्कुलेशन एरिया का मॉडल मौके पर विकसित किया जा रहा है. अगले 5 से 6 दिनों तक रोज सुबह इसी तरह पैदल निरीक्षण जारी रहेगा, ताकि पूरे 29 किलोमीटर क्षेत्र का विस्तृत आकलन किया जा सके.
सबसे लंबा स्नान कॉरिडोर बनेगा
प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में 9 किलोमीटर पुराने घाटों और 29 किलोमीटर नए घाटों को मिलाकर 37 किलोमीटर लंबा स्नान कॉरिडोर तैयार किया जाएगा. वहीं अनुमान है कि प्रमुख स्नान पर्वों पर 3 से 4 करोड़ श्रद्धालु पहुंचेंगे, जबकि एक दिन में करीब 5 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की क्षमता विकसित की जा रही है. कलेक्टर ने कहा कि कोशिश यह है कि कहीं भी क्रॉसिंग या जाम की स्थिति न बने. श्रद्धालु पार्किंग में वाहन खड़ा करने के बाद निर्धारित मार्ग से सीधे घाट तक पहुंचें, स्नान करें और 15 से 20 मिनट में व्यवस्थित रूप से बाहर निकल जाएं
