नई दिल्ली:– एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई युद्ध के पहले जैसी नहीं है। कोई भी और कभी भी सिलेंडर आराम से पा जाता था। लेकिन, जब से एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी 100 पर्सेंट DAC कोड के जरिए होने लगी है तब से किल्लत और बढ़ गई है। खासकर उनकी, जिनके पास कनेक्शन नहीं हैं या हैं तो किसी और शहर में था और कोरोना काल में अपने गांव लौट आए हैं।
हालांकि यह समस्या बहुत छोटे पैमाने पर है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक बहुत से कम मुनाफे वाले ठेले-खोमचे वालों को भी दुकान बंद करनी पड़ी है, जिससे सस्ता खाना मिलना भी कम हो गया। एक मजदूर ने ब्लूमबर्ग को बताया कि वह दिनों से ठीक से खाना नहीं खा पाया है। वहीं, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का दावा है कि उनके पास 45 दिनों का स्टॉक है और कहीं कोई एलपीजी सिलेंडर की कमी नहीं है।
हकीकत की बात करें तो जिन लोगों के पास पक्का पता है, यानी वैलिड कनेक्शन है तो उनके लिए भी हालात पहले जैसे नहीं है। बुकिंग के बाद भी उन्हें 25 से 45 दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है। रेट की बात करें तो दिल्ली के उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलो के सिलेंडर का दाम पिछले दिनों करीब 7% बढ़कर 913 रुपये (9.50 डॉलर) हो गया और सबसे बड़ी दिक्कत रिफिल करवाने के लिए लंबे इंतजार की है।
लोग तो अब पूछने लगे हैं कि क्या गैस की स्थिति ऐसे ही रहेगी। एक्सपर्ट्स की मानें तो जबतक होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही पहले की तरह नहीं होगी, तबतक हालात ऐसी ही रहेंगे या यूं कहें इससे बदतर भी हो सकते हैं। घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए गैस महंगी बनी हुई है और बड़े सिलेंडर पर खर्च तेजी से बढ़ रहा है।
