नई दिल्ली:- नई सर्टिफिकेशन गाइडलाइंस में विदेशी देशों के साथ भारत के रिश्तों, हिंसा, नशे, सामाजिक संवेदनशीलता और फिल्म के टाइटल को लेकर कई प्रावधान शामिल किए गए हैं। गलवान की घटना पर आधारित सलमान खान की फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ को लेकर भी इन नियमों की चर्चा तेज हो गई है।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन यानी CBFC के पुनर्गठन के बाद फिल्मों को सर्टिफिकेट देने से जुड़े नियम एक बार फिर चर्चा में हैं। करीब एक दशक बाद बोर्ड के पुनर्गठन में फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े कई चर्चित नामों को शामिल किया गया है। इसी के साथ सर्टिफिकेशन से जुड़ी गाइडलाइंस में फिल्मों के कंटेंट को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं।
इन नियमों के तहत किसी फिल्म को सर्टिफिकेट देने से पहले उसके कंटेंट, कहानी, संवाद, दृश्यों और सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखने की बात कही गई है। गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि फिल्मों को समाज के मूल्यों और मानकों के प्रति जिम्मेदार और संवेदनशील होना चाहिए। साथ ही सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को बदलते सामाजिक माहौल के प्रति भी संवेदनशील रखने की बात कही गई है।
नई गाइडलाइंस में सबसे ज्यादा चर्चा उस प्रावधान की हो रही है, जिसमें कहा गया है कि फिल्मों से विदेशी देशों के साथ भारत के दोस्ताना रिश्तों पर बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए। इसके अलावा सांप्रदायिक, अंधविश्वासी, विज्ञान-विरोधी या राष्ट्र-विरोधी सोच को बढ़ावा देने वाले दृश्य और संवाद नहीं दिखाए जाने चाहिए।
यह नियम खास तौर पर उन फिल्मों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जिनकी कहानी भारत और किसी दूसरे देश के बीच तनाव, युद्ध या सैन्य संघर्ष पर आधारित है। ऐसे मामलों में फिल्म के कंटेंट और प्रस्तुति को लेकर CBFC की ओर से अतिरिक्त सावधानी बरती जा सकती है।
इसी बीच सलमान खान की आने वाली वॉर ड्रामा फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। फिल्म की कहानी वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुए सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है। फिल्म का शुरुआती नाम ‘गलवान अटैक’ बताया गया था।
हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि फिल्म को CBFC सर्टिफिकेशन मिलने में देरी हो रही है। रिपोर्ट में फिल्म के चीन से जुड़े विषय को भी देरी के संभावित कारणों में शामिल बताया गया है। हालांकि, सर्टिफिकेशन में देरी के कारणों को लेकर आधिकारिक तौर पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
फिल्म को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट में मामले से जुड़े एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि निर्माता किसी नए विवाद से बचने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार फिल्म में चीन के सीधे जिक्र को लेकर भी सावधानी बरती जा रही है।
यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब नई CBFC गाइडलाइंस में विदेशी देशों के साथ भारत के रिश्तों को लेकर विशेष प्रावधान मौजूद हैं। हालांकि, किसी फिल्म के अंतिम संस्करण में क्या दिखाया जाएगा और CBFC की ओर से उसे किस तरह का सर्टिफिकेट दिया जाएगा, यह आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
नई गाइडलाइंस में फिल्मों में हिंसा के चित्रण को लेकर भी कई बातें कही गई हैं। इसमें हिंसा का महिमामंडन नहीं करने और अपराध करने के तरीकों को बढ़ावा देने वाले दृश्य या शब्दों से बचने की बात कही गई है।
ऐसे कंटेंट से भी बचने का निर्देश है जो लोगों को अपराध करने के लिए उकसा सकता है। इसके साथ ही बच्चों के शोषण, महिलाओं के खिलाफ अपराध और गैर-जरूरी या टाली जा सकने वाली हिंसा के चित्रण को लेकर भी संवेदनशीलता बरतने की बात कही गई है।
इसका मतलब यह है कि किसी फिल्म में हिंसा या अपराध दिखाए जाने पर केवल कहानी का हिस्सा होने की वजह से उसे नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, बल्कि उसके प्रस्तुतिकरण और संभावित प्रभाव को भी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में देखा जा सकता है।
गाइडलाइंस में नशीले और साइकोट्रोपिक पदार्थों से जुड़े दृश्यों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। अगर किसी फिल्म में ऐसे पदार्थों का सेवन, इस्तेमाल या तस्करी दिखाई जाती है तो संबंधित कानूनी चेतावनी या डिस्क्लेमर दिखाना जरूरी होगा।
इस प्रावधान का उद्देश्य फिल्मों में नशीले पदार्थों के चित्रण को लेकर दर्शकों को जरूरी चेतावनी उपलब्ध कराना है।
नई गाइडलाइंस में ऐसे कंटेंट को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही गई है, जो लोगों की भावनाओं या संवेदनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। धार्मिक, सामाजिक और संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों के लिए यह प्रावधान महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसके अलावा बच्चों से जुड़े शोषण और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे विषयों को दिखाते समय भी संवेदनशीलता रखने पर जोर दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत फिल्मों को उनके कंटेंट, प्रकृति और थीम के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में सर्टिफाई किया जा सकता है। इनमें UA, UA 7+, UA 13+, UA 16+ और A कैटेगरी शामिल हैं।
यदि कोई फिल्म बाकी मानदंडों को पूरा करती है, लेकिन उसकी सामग्री नाबालिगों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती, तो उसे वयस्क दर्शकों के लिए A कैटेगरी में सर्टिफाई किया जा सकता है।
वहीं जिन फिल्मों में माता-पिता के मार्गदर्शन की जरूरत मानी जाती है, उन्हें उम्र के आधार पर UA 7+, UA 13+ या UA 16+ कैटेगरी में रखा जा सकता है।
बिना किसी उम्र संबंधी रोक के सार्वजनिक प्रदर्शन वाली फिल्मों को लेकर भी गाइडलाइंस में प्रावधान हैं। ऐसी फिल्मों का कंटेंट इस तरह का होना चाहिए कि परिवार के सभी सदस्य, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं, उसे एक साथ देख सकें।
इसका मतलब है कि फिल्म की कहानी, संवाद और दृश्यों को सर्टिफिकेशन के दौरान दर्शकों की उम्र और कंटेंट की प्रकृति के आधार पर देखा जाएगा।
सिर्फ फिल्म की कहानी या दृश्यों पर ही नहीं, बल्कि उसके नाम यानी टाइटल को लेकर भी गाइडलाइंस में प्रावधान हैं। बोर्ड को यह देखना होगा कि फिल्म का नाम भड़काऊ, अश्लील या आपत्तिजनक न हो और वह सर्टिफिकेशन से जुड़े नियमों का उल्लंघन न करता हो।
पिछले कुछ वर्षों में फिल्मों के टाइटल और कंटेंट में बदलाव को लेकर कई फिल्में चर्चा में रही हैं। ऐसे में नई गाइडलाइंस के तहत टाइटल की जांच भी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया का अहम हिस्सा हो सकती है।
