नई दिल्ली:- गणेश चतुर्थी से गणेश उत्सव शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के साथ ही उत्सव का समापन हो जाता है। भगवान गणेश को सभी विघ्नों को हरने और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाले देवता माना गया है। ऐसे में अनंत चतुर्दशी पर विधिपूर्वक पूजा और गलतियों की क्षमा मांगकर भगवान गणेश को विदा करना चाहिए। इस दिन दोपहर में 2 बजकर 51 मिनट तक शूल योग रहेगा और रात को 11 बजकर 7 मिनट से भद्रा लग रहा है। ऐसे में आइए पंडित राकेश झा से जानते हैं कि अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के लिए कौन-कौन से शुभ मुहूर्त रहेंगे। साथ ही, गणेश विसर्जन की संपूर्ण विधि भी जानें।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 25 सितंबर को सूर्योदय से ही व्याप्त रहेगी और रात में 11 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगी। शास्त्रों में गणेश विसर्जन का दोपहर के बाद विधि बताया गया है। विसर्जन से पहले विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इसके बाद, दोपहर के बाद वाले शुभ मुहूर्त में गणेश विसर्जन करें। बता दें कि रात में 11 बजकर 07 मिनट से भद्रा लग रहा है और इसी समय चतुर्दशी तिथि भी समाप्त हो जाएगी। ऐसे में रात के 11:07 मिनट से पहले भगवान गणेश की प्रतिमा को प्रवाहित करना उत्तम रहेगा। वहीं, दोपहर में 2 बजकर 51 मिनट तक शूल योग रहेगा।
पंडित राकेश झा बताते हैं कि जिस प्रकार गणेश चतुर्थी पर अभिजीत मुहूर्त में गणेशजी की स्थापना की जाती है, उसी प्रकार अनंत चतुर्दशी पर अभिजीत मुहूर्त में गणेश विसर्जन करना भी शुभ रहेगा।
गणेश विसर्जन 2026 संपूर्ण विधि
अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन से पहले गणपति बप्पा की विधि-विधान से पूजा और हवन करना चाहिए।
एक लकड़ी की चौकी पर स्वास्तिक बनाएं और उस पर कुछ अक्षत रखें। इसके बाद, गुलाबी कपड़ा चौकी पर बिछा दें।
कपड़े के चारों तरफ सुपारी रखें और फिर, परिवार के साथ जयकारे लगाते हुए उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
गणपति बप्पा, धूप, फूल, फल आदि अर्पित करें और दीपक जलाकर विधि-विधान से पूजा- आरती करें।
गणेशजी को मौसमी फल, लड्डू, मोदक आदि का भोग लगाएं और उन्हें नए वस्त्र अर्पित करें।
एक रेशमी वस्त्र लेकर उसमें मोदक, सुपारी, फूल और फल डालकर उसे भगवान गणेश के समीप रखें। फिर, दोनों हाथ जोड़कर प्रार्थना करें।
पूजा में अनजाने में हुई गलतियों के लिए भगवान गणेश से क्षमा मांगे। इसके बाद, बप्पा के दाएं कान में अपनी मनोकामना बताएं।
शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश के जयकारे लगाते हुए अपने परिवार के साथ उन्हें घर के समीप वाली पवित्र नदी में विसर्जन स्थल पर ले जाएं।
विसर्जन के समय गणेशजी की कपूर से आरती करें और फिर, उनका विसर्जन कर दें। जिस चौकी पर आप बप्पा को लेके जाएं उसे घर में संभालकर रखना चाहिए।
