नई दिल्ली: चुनाव में तैनात CAPF के कंपनी कमांडरों ने उन्हें होटल छोड़कर बुनियादी सुविधाओं के अभाव वाले स्कूलों में रुकने के नए आदेश का कड़ा विरोध किया है।
पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया में तैनात किए गए बीएसएफ और सीआरपीएफ समेत तमाम सीएपीएफ के मामले में अब एक नया मसला तूल पकड़ता जा रहा है। मसला है सीएपीएफ के कंपनी कमांडरों को होटल और गेस्ट हाउस छोड़कर अपनी कंपनियों के साथ ही स्कूलों में स्टे करने का। जिसके खिलाफ सीएपीएफ के कंपनी कमांडर खुलकर सामने आ गए हैं। इनका कहना है कि यह आदेश सीएपीएफ ग्रेड-वन अधिकारियों को परेशान करने वाला और चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ है।
कंपनी कमांडरों ने की शिकायत
आदेशों का विरोध करते हुए बीएसएफ के एक कंपनी कमांडर ने तो बाकायदा इसकी लिखित में शिकायत पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए सीएपीएफ और स्टेट फोर्स के लिए कोऑर्डिनेटर के रूप में तैनात किए गए पश्चिम बंगाल सेक्टर में आईजी पुलिस से की है।
क्या था पूरा मामला
सीएपीएफ कैडर अधिकारियों का कहना है कि यहां 12 मार्च से बीएसएफ और सीआरपीएफ समेत सीएपीएफ के तमाम बलों के जवानों को आवश्यकतानुसार तैनात करना शुरू कर दिया गया था। जिसमें सीएपीएफ के तमाम कंपनी कमांडरों को होटल और गेस्ट हाउस में स्टे करने की सुविधा दी गई थी।
आदेश पर क्या है अधिकारियों का कहना
पिछले दिनों अचानक एक आदेश जारी करके कंपनी कमांडरों की भूमिका निभा रहे असिस्टेंट कमांडेंट और इससे उपर के अधिकारियों को होटल और गेस्ट हाउस छोड़कर स्कूलों में अपनी कंपनियों के साथ ही शिफ्ट होने के आदेश जारी कर दिए गए। अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में ना तो मूलभूत सुविधाएं हैं और ना ही स्टे करने का अनुकूल माहौल।
आईपीएस अफसरों के लिए भी जारी होगा ऐसा ही
अधिकारियों का कहना है कि सीएपीएफ के कंपनी कमांडरों को तो स्कूलों में स्टे करने के आदेश दे दिए गए। लेकिन क्या इसी तरह के आदेश आईपीएस अफसरों के लिए भी जारी किए जाएंगे?
अगर नही तो यह अधिकारियों के साथ भेदभाव पूर्ण नीति है। इससे चुनावी डयूटी पर भी असर पड़ेगा। इस बात की शिकायत चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के सीईओ को भी की गई है। शिकायत में कहा गया है कि प्रशासन को दिए गए इस आदेश को वापस लेना चाहिए या इसमें संशोधन करना चाहिए।
मनीष अग्रवाल
