कांग्रेस के विधायकों को डर लग रहा है कि अगर स्पीकर की कुर्सी पर बैठे तो उनका राजनीतिक कैरियर चौपट हो जाएगा. दरअसल, 2004 के बाद से जिस विधायक को स्पीकर बनाया गया है उसे अगले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. बसवराज बोम्मई की सरकार में स्पीकर रहे विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. यही वजह है कि विधायकों में डर बैठ गया है,
जिससे कांग्रेस को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.साल 2004 में कृष्णा को विधानसभा अध्यक्ष बनाए गए और वे 2008 में हारे. 2013 में कगोडू थिम्मप्पा अध्यक्ष बने और वे 2018 में हारे. 2016 में के.बी. कोलीवाड चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे और 2018 के आम चुनाव में टिकट मिली तो वो भी हार गए. इसके अलावा 2019 में उपचुनाव भी नहीं जीत सके.
सिद्धारमैया अगला विधासभा अध्यक्ष डॉ. जी. परमेश्वर को बनाना चाहते थे, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें कैबिनेट में जगह दी गई.ये नेता बन सकते हैं विधानसभा अध्यक्षबताया जा रहा है कि कांग्रेस बी.आर. पाटिल, वाई.एन. गोपालकृष्ण, टी.बी. जयचंद्र, एच.के. पाटिल जैसे सीनियर नेताओं में से कि एक का नाम विधानसभा स्पीकर के लिए आगे कर सकती है.