नई दिल्ली:– दिल्ली आबकारी मामले में आज सीएम केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उन्हें बेल दे दी है। केजरीवाल की बेल पर 2-0 से फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्वल भुइयां की बेंच ने शर्तों और 10 लाख के निजी मुचलके पर दिल्ली के मुख्यमंत्री को जमानत दी हैं। केजरीवाल पर वही शर्ते रहेंगी जो ईडी के केस में मिली बेल के दौरान थीं। इससे पहले शीर्ष अदालत ने सीएम केजरीवाल की गिरफ्तारी को अवैध नहीं माना था पर कहा कि किसी भी नेता को बहुत दिनों तक जेल में नहीं रखा जा सकता। सीएम केजरीवाल को सरकारी काम और दस्तखत
5 सिंतबर को सुरक्षित रख लिया था फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 5 सिंतबर को केजरीवाल की जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। सीएम अरविंद केजरीवाल ने जमानत की मांग करते हुए कहा है कि सीबीआई ने इस मामले में दो साल तक गिरफ्तार नहीं किया। मनी लॉन्ड्रिंग जैसे कठोर कानून में केजरीवाल को जमानत मिल चुकी है। मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। इस मामले में अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और केजरीवाल से समाज को खतरा नहीं है और उनके भागने का कोई अंदेशा नहीं है लिहाजा उन्हें जमानत दी जाए।
मनी लॉन्ड्रिंग में बेल, करप्शन केस में अंदर
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के खिलाफ आबकारी नीति मामले में करप्शन और मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में केजरीवाल को जमानत मिल चुकी है जबकि करप्शन केस में जेल में बंद हैं। वहीं सीबीआई की ओर से दलील दी गई कि केजरीवाल ने बिना सेशन कोर्ट गए हाई कोर्ट को अप्रोच किया। हमारा प्रारंभिक ऑब्जेक्शन यही है कि पहले मामले को ट्रायल कोर्ट द्वारा एग्जामिन किया जाना चाहिए। साधारण सा सिद्धांत है कि पहले सेशन कोर्ट को अप्रोच किया जाना चाहिए। वह सीधे हाई कोर्ट गए और ट्रायल कोर्ट नहीं गए। इसके बाद हाई कोर्ट से रिलीफ नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।
