मध्यप्रदेश:– एक शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर सपने देखने और उन्हें पूरा करने का विश्वास पैदा करता है। इसी सोच को अपनी शिक्षण पद्धति का हिस्सा बनाकर काम कर रहीं भोपाल की सरकारी स्कूल की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए हुआ है। मध्यप्रदेश से इस वर्ष दो शिक्षकों का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए किया गया है, जिनमें डॉ. अर्चना शुक्ला का नाम भी शामिल है। 5 सितंबर को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
डॉ. अर्चना शुक्ला भोपाल के महात्मा गांधी शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, BHEL में उच्च माध्यमिक शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। पिछले 16 वर्षों से शिक्षण के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. अर्चना ने पारंपरिक क्लासरूम शिक्षण को किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे Project-Based Learning (PBL), नवाचार और वास्तविक जीवन से जुड़ी गतिविधियों से जोड़ा है।
एक अनुभव ने बदल दी जिंदगी की दिशा
डॉ. अर्चना के शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के पीछे उनकी अपनी जिंदगी का एक अनुभव भी महत्वपूर्ण रहा है। जब वह स्वयं पढ़ाई कर रही थीं, तब उनका PMT में चयन महाराष्ट्र के एक नर्सिंग कॉलेज के लिए हुआ था। लेकिन मध्यप्रदेश की मूल निवासी नहीं होने के कारण उनसे अन्य विद्यार्थियों की तुलना में तीन गुना फीस मांगी गई।
यही वह अनुभव था, जिसने उनके मन में एक संकल्प पैदा किया। उन्होंने तय किया कि वह मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में अपने स्तर पर ऐसा काम करेंगी, जिससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के सपनों के रास्ते में आर्थिक या भौगोलिक सीमाएं बाधा न बनें।
इसके बाद शिक्षण के क्षेत्र में उन्हें कई दूसरे अवसर और ऑफर भी मिले, लेकिन उन्होंने सरकारी स्कूल के बच्चों के साथ काम करने को प्राथमिकता दी।
किताबों से बाहर निकली पढ़ाई
डॉ. अर्चना ने अपने क्लासरूम को प्रयोग और सीखने की जगह बनाया। उन्होंने विद्यार्थियों को Project-Based Learning के जरिए वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान तलाशने के लिए प्रेरित किया।
उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने पेड़ों की QR कोडिंग, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े प्रोजेक्ट तैयार किए। बच्चों ने अपने आसपास मौजूद पेड़ों की जानकारी को QR कोड से जोड़ने का काम किया, जिससे तकनीक और पर्यावरण शिक्षा को एक साथ जोड़ा गया।
इसी तरह गौरैया संरक्षण के क्षेत्र में भी उन्होंने विद्यार्थियों के साथ काम किया। बच्चों ने गौरैया के संरक्षण के लिए मॉडल और घोंसले तैयार किए तथा पक्षियों के संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाया।
इस पूरी प्रक्रिया में बच्चों को सिर्फ किसी विषय का उत्तर याद करने के बजाय उसे समझने, प्रयोग करने और समाज से जोड़ने का अवसर मिला।
भोपाल से जापान तक पहुंचे विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट
डॉ. अर्चना के मार्गदर्शन में तैयार किए गए विद्यार्थियों के कई प्रोजेक्ट सिर्फ स्कूल या स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहे। उनके विद्यार्थियों ने अपने Project-Based Learning के कार्यों को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया, जिसमें जापान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रोजेक्ट प्रस्तुत करने का अवसर भी शामिल है।
उनके विद्यार्थियों ने विज्ञान, पर्यावरण और नवाचार से जुड़े विभिन्न स्तरों के आयोजनों में हिस्सा लिया और कई उपलब्धियां हासिल कीं। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक सोच और शोध की दिशा में भी काम किया तथा शोध-पत्र प्रकाशित करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
IIT और UPSC तक पहुंचे विद्यार्थी
डॉ. अर्चना के लिए विद्यार्थियों की सफलता केवल स्कूल की प्रतियोगिताओं या पुरस्कारों तक सीमित नहीं है। उनके पढ़ाए कई विद्यार्थी आगे चलकर IIT और UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल कर चुके हैं।
उनका मानना है कि एक शिक्षक का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को अच्छे अंक दिलाना नहीं होना चाहिए, बल्कि उनमें वैज्ञानिक सोच, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान की क्षमता और समाज के प्रति जिम्मेदारी विकसित करना भी होना चाहिए।
दूसरे शिक्षकों को भी देती हैं PBL की ट्रेनिंग
डॉ. अर्चना का काम सिर्फ अपने स्कूल के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। वह Project-Based Learning और विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में दूसरे शिक्षकों को भी प्रशिक्षण देती हैं।
