नयी दिल्ली, 01 जनवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि लागत कम करने के लिए शनिवार को किसानों को किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से खेती करने की सलाह दी और प्राकृतिक तरीके से किसानी करने का सुझाव दिया।
श्री मोदी वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आयोजित सम्मेलन में किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान निधि की दसवीं किस्त के तहत 20 हजार करोड़ रुपए की राशि हस्तांतरित करने के बाद उन्हें संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर एफपीओ को इक्विटी राशि भी जारी की। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए बताया कि इस कार्यक्रम के लिए देश भर से करीब आठ करोड़ किसानों ने पंजीकरण कराया था।
श्री मोदी ने कहा कि कोरोना की चुनौतियों के बावजूद हमें वर्ष 2022 में आर्थिक वृद्धि की गति को तेज करना होगा और इस महामारी से लड़ते हुए राष्ट्रीय हितों काे पूरा करना होगा। इस कार्यक्रम में हरियाणा,गुजरात और अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री भी जुड़े थे।
श्री मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि किसानों को बिना किसी बिचौलिए के हर किस्त समय पर जारी की गई है । पहले इसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती थी। अब तक एक लाख अस्सी हजार करोड़ रुपए किसानों को बैंक खातों में हस्तांतरित किए जा चुके हैं । इससे किसान अच्छे बीज, खाद और उपकरण खरीदते हैं। इस मदद से छोटे किसानों का समर्थ बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एफपीओ से छोटे किसानों को फायदा हो रहा है। इससे किसानों की मोल-भाव की शक्ति बढ़ती है। अलग-अलग खेती से कृषि की लागत बढ़ती है क्योंकि वे अपनी जरूरतों की चीजों को फुटकर में खरीदते हैं और अपने उत्पाद थोक में बेचते हैं।
उन्होंने कहा कि एफ पी ओ में थोक में बड़े पैमाने पर व्यापार होता है। डी पी ओ से किसानों को नवाचार की जानकारी मिलती है। रिस्क मैनेजमेंट में सहायता मिलती है और बाजार के हिसाब से बदलने की क्षमता हासिल होती है। जी पी ओ को सरकार 15 लाख रुपए तक की मदद देती है।
उन्होंने कहा कि तिलहन, शहद और कई अन्य वस्तुओं के जैविक उत्पादन के लिए क्लस्टर बढ़ रहे हैं। एक जिला एक उत्पाद को बढ़ावा मिल रहा है।