मध्यप्रदेश:– सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में भीड़ के दौरान बच्चों और बुजुर्गों के गुम होने की समस्या प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। इसी को देखते हुए आरपीएफ और महाराष्ट्र के एक एनजीओ ने मिलकर आरएफआईडी बैंड ट्रैकिंग की विशेष योजना तैयार की है।
इस तकनीक के तहत श्रद्धालुओं को विशेष आरएफआईडी बैंड दिए जाएंगे, जिनकी मदद से उनकी लाइव लोकेशन तुरंत ट्रैक की जा सकेगी। खास बात यह है कि यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क होगी, जिससे मेले में सुरक्षा और लोगों की खोज प्रक्रिया आसान हो सकेगी।
क्या है आरएफआईडी तकनीक?
आरएफआईडी (RFID) यानी रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन एक आधुनिक ट्रैकिंग तकनीक है, जिसमें विशेष बैंड व्यक्ति के हाथ में बांधा जाता है। इस बैंड में संबंधित व्यक्ति की जरूरी जानकारी सुरक्षित रूप से दर्ज रहती है। सिंहस्थ क्षेत्र में लगाए जाने वाले ट्रैकिंग सिस्टम इस बैंड को तुरंत पहचान सकेंगे। इसके जरिए एक क्लिक पर व्यक्ति की लाइव लोकेशन प्राप्त की जा सकेगी। इस तकनीक से मेले में गुम हुए बच्चों और बुजुर्गों को तलाशना काफी आसान और तेज हो जाएगा।
महाराष्ट्र के एनजीओ और आरपीएफ की साझेदारी
रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और महाराष्ट्र के एक प्रतिष्ठित एनजीओ ने मिलकर इस विशेष योजना को तैयार किया है। आरपीएफ पोस्ट प्रभारी नरेंद्र कुमार यादव के मुताबिक, स्टेशन पर पहुंचते ही श्रद्धालु इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे। योजना के तहत बच्चों और बुजुर्गों की जरूरी जानकारी दर्ज करने के बाद उन्हें आरएफआईडी बैंड उपलब्ध कराया जाएगा। सिंहस्थ क्षेत्र में जगह-जगह ट्रैकिंग सिस्टम लगाए जाएंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत लोकेशन पता की जा सके। वहीं, गुमशुदा केंद्रों पर एनजीओ के प्रशिक्षित कर्मचारी 24 घंटे तैनात रहेंगे।
बिलकुर फ्री रहेगी यह सेवा
बता दें कि, यह सुविधा श्रद्धालुओं को पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। आरएफआईडी बैंड लगाने से लेकर गुम हुए व्यक्ति को तलाशने तक का पूरा खर्च संबंधित एनजीओ द्वारा उठाया जाएगा, जबकि रेलवे विभाग भी आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा। हालांकि, यह व्यवस्था अनिवार्य नहीं होगी। श्रद्धालु अपनी इच्छा अनुसार इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे। किसी व्यक्ति के गुम होने की सूचना मिलते ही तुरंत खोज अभियान शुरू किया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं और उनके परिवारों को मेले के दौरान काफी राहत और मानसिक सुकून मिल सकेगा।
