मध्यप्रदेश:– जबलपुर में बच्चों के भारी स्कूल बैग को लेकर प्रशासन अब सख्त नजर आ रहा है। बाल संरक्षण आयोग और लोक शिक्षण संचालनालय ने कलेक्टर को पत्र भेजकर स्कूलों में नेशनल बैग पॉलिसी का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पहली कक्षा के छात्र का स्कूल बैग 1078 ग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। तय मानकों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
संचालनालय ने यह भी कहा है कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों के लिए स्कूल बैग जरूरी नहीं है। वहीं कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए बैग का अधिकतम वजन निर्धारित किया गया है। निर्देश में बताया गया है कि जरूरत से ज्यादा भारी बस्ते बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकते हैं और उन पर मानसिक दबाव भी बढ़ा सकते हैं।
स्कूल बैग के वजन को जांचने के निर्देश
जानकारी के अनुसार समग्र शिक्षा अभियान और लोक शिक्षण संचालनालय की अपर परियोजना संचालक नंदा भलावे ने पहले ही जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर स्कूलों में बच्चों के बैग का वजन जांचने के निर्देश दिए थे। निरीक्षण के दौरान यह जानकारी भी मांगी गई थी कि छात्रों के बैग का वजन निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं। हालांकि अब तक किसी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई या औपचारिक जांच की जानकारी सामने नहीं आई है।
कक्षा के अनुसार इतना होना चाहिए बैग का वजन
कक्षा बैग का निर्धारित वजन
प्री-प्राइमरी बैग आवश्यक नहीं
कक्षा 1 1078 ग्राम
कक्षा 2 1080 ग्राम
कक्षा 3 1572 ग्राम
कक्षा 4 1804 ग्राम
कक्षा 5 1916 ग्राम
कक्षा 6 3080 ग्राम
कक्षा 7 3508 ग्राम
कक्षा 8 3640 ग्राम
कक्षा 9 4400 ग्राम
कक्षा 10 4182 ग्राम
कक्षा 11वीं-12वीं 3.5 किलो से 5 किलो तक
भारी वजन वाले बैग का शरीर पर पढ़ सकता है असर
बाल संरक्षण आयोग ने अपने पत्र में कहा है कि कई निजी स्कूल अब भी निर्धारित नीति का पालन नहीं कर रहे हैं और छोटे बच्चों को भारी स्कूल बैग लेकर आने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आयोग के मुताबिक इसका बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। आयोग ने कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में नेशनल बैग पॉलिसी का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए भी कहा गया है।
