नई दिल्ली:- देशभक्ति का जज्बा जब पूरे गांव की पहचान बन जाए, तो नजारा भी ऐसा होता है कि हर कोई गर्व से भर उठे। बिलासपुर जिले के लखराम गांव में रोजाना शाम 4 बजे 30 लाउडस्पीकरों से वंदे मातरम की गूंज सुनाई देती है और इसके साथ ही गांव की रफ्तार थम जाती है। खेतों में काम करने वाले किसान, स्कूल के बच्चे, दुकानदार, मजदूर और राहगीर, सभी अपनी जगह रुककर राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े हो जाते हैं। इस अनूठी पहल के पीछे ग्रामीणों की सामूहिक सोच और देश की आने वाली पीढ़ी में देशप्रेम की भावना जगाने का संकल्प है। खास बात यह है कि इस पहल को शुरू करने की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम से मिली। देखिए लखराम गांव से देशभक्ति की यह खास तस्वीर।
लखराम गांव में हर शाम चार बजते ही देशभक्ति का एक अलग ही माहौल बन जाता है। गांव के प्रमुख स्थानों पर लगाए गए करीब 30 लाउडस्पीकरों से वंदे मातरम की धुन गूंजती है, तो गांव के लोग अपना काम रोककर सम्मान में खड़े हो जाते हैं। स्कूलों में बच्चे, दुकानों पर व्यापारी, संस्थानों में कर्मचारी और खेतों में मेहनत कर रहे मजदूर भी इस परंपरा में अपनी भागीदारी निभाते हैं। ग्रामीण मन्नू लाल कैवर्त बताते हैं कि गांव के व्यापारी, प्रबुद्धजन और सरकारी कर्मचारी भी इस पहल से जुड़कर वंदे मातरम का सम्मान करते हैं। उनका मानना है कि यह प्रयास गांव की एकता और प्रगति के लिए अच्छी पहल है। सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे गांव की सहभागिता दिखाई देती है। गांव की गलियों से लेकर खेतों और बाजारों तक, दो मिनट का यह ठहराव देश के प्रति सम्मान और सामूहिक एकजुटता का संदेश देता है।
इस अनूठी पहल की शुरुआत के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम से मिली प्रेरणा है। ग्रामीण रुक्मणी साहू बताती हैं कि कार्यक्रम सुनने और देखने के बाद उनके मन में विचार आया कि गांव में भी ऐसा प्रयास होना चाहिए, जिससे लोगों के बीच देशप्रेम का अच्छा संदेश पहुंचे। इसके बाद गांव में बैठक बुलाई गई, प्रस्ताव रखा गया और लाउडस्पीकरों के माध्यम से इस पहल की शुरुआत की गई। अब हर शाम चार बजे खेतों में काम करने वाले लोग हों या स्कूल के बच्चे, रास्ते से गुजरते राहगीर हों या अपनी दुकानों पर बैठे व्यापारी, सभी कुछ देर रुककर वंदे मातरम के सम्मान में खड़े होते हैं। लखराम की यह पहल बताती है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सामूहिक इच्छाशक्ति और अच्छी सोच कितनी महत्वपूर्ण है। यहां देशभक्ति किसी एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि रोज निभाई जाने वाली परंपरा बन रही है, जो आने वाली पीढ़ी को देश के प्रति सम्मान, एकता और जिम्मेदारी का संदेश दे रही है।
