नई दिल्ली:- जितिया व्रत की शुरुआत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर नहाय-खाय से हो जाती है, जो इस बार आज यानी 2 अक्टूबर, शुक्रवार को है। वहीं, अष्टमी तिथि पर निर्जला व्रत करने का विधान होता है। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को लगने से इसी दिन जितिया का व्रत किया जाएगा। महिलाएं यह व्रत अपने संतान की सलामती के लिए करती हैं। मान्यता है कि नहाय-खाय से लेकर पारण तक विधिपूर्वक व्रत करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है। ऐसे में यदि आप भी जीवित्पुत्रिका व्रत पहली बार रखने जा रही हैं, तो चलिए विस्तार से जानें आज से लेकर पारण तक की पूरी विधि
आश्विन कृष्ण सप्तमी तिथि पर व्रती को चाहिए कि झिमनी के पत्ते पर सरसों का तेल, सरसों की खली और फूल रखकर नदी अथवा तालाब में स्नान करें।
यदि नदी या तालाब में स्नान करना संभव न हो, तो घर में पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद, तेल सिर पर लगाएं और एक बार दोबारा स्नान करें। ध्यान रखें कि सप्तमी के दिन स्नान करते समय साबुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
सभी सामग्री के साथ जीमूतवाहन भगवान की पूजा करनी चाहिए। विधि-पूर्वक पूजन के बाद चढ़ाया हुआ सरसों का तेल संतान के सिर पर आशीर्वाद के तौर पर लगाने का विधान होता है। यदि झिमनी के पत्ते उपलब्ध न हों, तो केले के पत्ते भी प्रयोग कर सकती हैं।
व्रती महिलाओं को अष्टमी तिथि के दिन सूर्योदय से पूर्व उठ जाना चाहिए। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में जितिया ओठगन रहेगा।
ओठगन के दौरान चूड़ा, दही, नारियल पानी, जल आदि ग्रहण किया जा सकता है। यह परंपरा अलग-अलग स्थान पर अलग-अलग हो सकती है।
भोजन करने के बाद महिलाओं को शरीर दरवाजे से टिकाकर जल ग्रहण करना चाहिए। कहते हैं कि इससे भाई की आयु लंबी होती है।
सूर्योदय से पूर्व भोजन करने के पश्चात पूरे दिन व्रत रखने का विधान होता है। इस दौरान पानी भी ग्रहण नहीं किया जाता है यानी निर्जला व्रत किया जाता है।
व्रत के दिन सुबह जितिया व्रत कथा के आरंभ से पहले एक बांस के बर्तन में फल, नारियल, मिठाई आदि रखकर उसे कपड़े से ढक लें। पूरे दिन व्रत के दौरान महिलाओं को भूलकर भी चाकू, कैंची आदि नुकीली चीजों को प्रयोग नहीं करना चाहिए।
व्रत पारण का समय : नवमी तिथि के दिन जितिया व्रत का पारण किया जाता है। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 4 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 52 मिनट तक व्याप्त रहेगी। ऐसे में इस दिन सूर्योदय के बाद ही व्रत का पारण करना शास्त्र सम्मत होगा।
व्रत पारण विधि : इस दिन व्रती महिलाओं स्नानादि करने के बाद विधि-पूर्वक पूजन करना चाहिए। पूजा के बाद, अपनी संतान से ढके हुए फल, मिठाई आदि पर से कपड़ा हटवाना चाहिए। फिर, प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण कर लें।
मान्यताओं के अनुसार, पारण के दिन आम के दतुअन से दातुन करना चाहिए। और कच्चे दूध से व्रत का पारण किया जाता है। कथाओं के अनुसार, चील ने जितिया का व्रत करने के बाद गौशाला से गाय का दूध लाकर व्रत खोला था।
