नई दिल्ली:– घर की साज-सज्जा का प्रभाव न केवल हमारी आंखों पर पड़ता है, बल्कि यह हमारे जीवन में बहने वाली ऊर्जा की दिशा को भी निर्धारित करता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, हम अपने आसपास जो चीजें रखते हैं, वे सीधे तौर पर हमारे घर की सुख-शांति और आर्थिक स्थिति से जुड़ी होती हैं. कई बार शौक या सजावट के नाम पर हम ऐसी पुरानी एंटीक वस्तुएं घर ले आते हैं, जो अनजाने में घर के वास्तु को बिगाड़ देती हैं. वहीं, दूसरी ओर वास्तु में बताए गए कुछ विशेष प्रतीकों को सही स्थान पर रखने से न केवल घर की सुंदरता बढ़ती है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है. यदि आप भी अपने जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का स्वागत करना चाहते हैं, तो वास्तु शास्त्र में वर्णित इन 5 विशेष वस्तुओं को अपने घर का हिस्सा बनाना आपके लिए अत्यंत लाभकारी हो सकता है.
हाथी की मूर्ति: वास्तु शास्त्र में हाथी को शक्ति, समृद्धि और सत्ता का प्रतीक माना गया है. भगवान गणेश का स्वरूप होने के कारण, घर में हाथी की मूर्ति रखना सौभाग्य लेकर आता है. चांदी का हाथी रखने से राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव शांत होते हैं. आप चांदी के अलावा पीतल या तांबे का हाथी भी रख सकते हैं, बस ध्यान रखें कि मूर्ति कम से कम 4 से 5 इंच की हो.
मंगल कलश: समुद्र मंथन के दौरान निकला अमृत कलश समृद्धि का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है. इस कलश को तांबे या पीतल में लेकर घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में स्थापित करें. इसमें जल भरकर तांबे का सिक्का डालें, ऊपर आम के पत्ते रखकर नारियल से मुख ढक दें; कलश पर स्वस्तिक का चिह्न बनाना और मौली बांधना बहुत शुभ होता है, जिससे घर में स्थायी लक्ष्मी का वास होता है.
बांसुरी और शंख: ये दोनों ही वस्तुएं वास्तु दोषों को दूर करने में चमत्कारिक मानी जाती हैं. बांसुरी को घर की पूर्व, ईशान या उत्तर दिशा में रखने से दरिद्रता दूर होती है, वहीं घर में शंख रखने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है .धन की कमी नहीं होती.
हंस का जोड़ा: घर के अतिथि कक्ष (Living Room) में हंस के जोड़े की मूर्ति या फोटो रखना बहुत शुभ माना गया है, क्योंकि यह शांति और शुद्धता का प्रतीक है. इसे रखने से दांपत्य जीवन में सामंजस्य बना रहता है.
धातु का कछुआ: धातु का कछुआ उन्नति, धन और लंबी आयु का द्योतक माना जाता है. इसे हमेशा पीतल या चांदी जैसी धातु का ही रखें और लकड़ी के कछुए से बचें; इसे ड्राइंग रूम में किसी पात्र में जल भरकर उत्तर या पूर्व दिशा में रखें, जिसका मुंह अंदर की तरफ होना चाहिए.
