नई दिल्ली:– हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को पूजनीय माना गया है। हर एक हिंदू घर में तुलसी का पौधा जरूर होता है और नियमित रूप से पूजा होती है। धार्मिक नजरिए के साथ-साथ वास्तु शास्त्र में ही तुलसी को सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
यही नहीं वास्तु में इसकी सही दिशा और इसे रखने के स्थान के बारे में बताया गया है। यूं कहा जाए कि सदियों से हिंदू परंपराओं का अनमोल हिस्सा रहा तुलसी का पौधा न केवल एक पवित्र जड़ी-बूटी है, बल्कि सकारात्मकता का प्रतीक भी है।
कई बार इस पौधे को लेकर मन में एक सवाल आता है कि क्या घर में एक से ज्यादा तुलसी के पौधे लगाए जा सकते हैं? आइए आपको बताते हैं वास्तु से जुड़े इस सवाल के सही जवाब के बारे में।
घर में एक से अधिक तुलसी के पौधे लगाना चाहिए या नहीं?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में तुलसी के पौधे लगाने की बात करें तो आप घर में एक से ज्यादा पौधे लगा सकते हैं, लेकिन कोशिश करें कि आप इन्हें विषम संख्या में ही लगाएं जैसे कि 3, 5 या 7 पौधे एक साथ लगाने शुभ माने जाते हैं।
आप बहुत ज्यादा पौधे भी न लगाएं क्योंकि ये तुलसी वन बन जाता है और इन सभी पौधों की सही देखभाल न करने से इसकी पूजा के पूर्ण फल भी नहीं मिलते हैं।
तुलसी के पौधे से जुड़े क्या है वास्तु नियम?
साफ स्थान पर लगाए
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आप घर में तुलसी का पौधा लगा रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि इसे आप घर के आंगन या बालकनी में ही लगाएं। इसे आप छत में भी लगा सकते हैं, लेकिन कोशिश करें कि तुलसी को हमेशा साफ स्थान पर ही रखें। आप भूलकर भी तुलसी के पौधे को घर की गलत दिशा में न लगाएं इससे आपको पूजा के लाभ की जगह नुकसान हो सकते हैं।
रविवार और एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल न दें
घर में लगा तुलसी का पौधा कभी सूखना नहीं चाहिए और आपको इसे नियमित जल देना चाहिए। रविवार और एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल नहीं देना चाहिए क्योंकि इस दिन माता तुलसी भी विष्णु जी के लिए निर्जला उपवास करती हैं। अगर आप भी घर में तुसली का पौधा रखती हैं तो इसकी सही देखभाल जरूरी है और आपको हमेशा इसके लिए कुछ वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए।
तुलसी के पौधे के ना हो कूड़ेदान या गंदगी
वास्तु शास्त्र के अनुसार, कभी तुलसी के पौधे के पास कूड़ेदान या फिर फैली हुई गंदगी नहीं होनी चाहिए। तुलसी के पौधे के पास गंदगी होने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह उतना नहीं होता है और आर्थिक परेशानियां बढ़ने लगती हैं।
