नई दिल्ली:– इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चौथे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव की मांग करने वाली एक महिला सरकारी कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मौजूदा नियमों का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित शर्तों के तहत चौथे बच्चे के लिए सामान्य मैटरनिटी लीव का लाभ नहीं दिया जा सकता।
मामला संभल जिले से जुड़ा है, जहां सरकारी कर्मचारी शशि कुमारी ने ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें चौथे बच्चे के लिए उनकी मैटरनिटी लीव की मांग को मंजूर नहीं किया गया था। कर्मचारी ने अदालत से छह महीने की मैटरनिटी लीव देने का निर्देश जारी करने की मांग की थी।
पहले तीन बच्चों पर नहीं ली थी छुट्टी, फिर भी नहीं मिली राहत
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्होंने अपने पहले तीन बच्चों के जन्म के समय मैटरनिटी लीव का लाभ नहीं लिया था। ऐसे में चौथे बच्चे के जन्म पर उन्हें मैटरनिटी लीव दी जानी चाहिए।
याचिकाकर्ता के वकील ने संबंधित अधिकारी के आदेश को गलत और मनमाना बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की। उनका तर्क था कि पहले तीन प्रसव के दौरान छुट्टी नहीं लेने के कारण इस बार महिला को मैटरनिटी लीव से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने इस दलील का विरोध किया। सरकार की ओर से कहा गया कि संबंधित नियमों के अनुसार महिला कर्मचारी चौथे बच्चे के लिए सामान्य मैटरनिटी लीव की पात्र नहीं हैं।
कोर्ट ने नियमों के आधार पर याचिका की खारिज
मामले की सुनवाई जस्टिस चौहान की अदालत में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और इसे खारिज कर दिया।
अदालत के फैसले का आधार मैटरनिटी लीव से जुड़े मौजूदा सेवा नियम रहे। यानी पहले बच्चों के समय छुट्टी का लाभ नहीं लेने का तर्क अपने आप में चौथे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव का अधिकार पैदा नहीं करता।
सरकारी महिला कर्मचारियों के लिए क्या है मैटरनिटी लीव का नियम?
सरकारी सेवा नियमों के तहत पात्र महिला कर्मचारी को सामान्य परिस्थितियों में 180 दिन यानी करीब छह महीने की मैटरनिटी लीव का प्रावधान है। यह सुविधा सामान्य तौर पर ऐसी महिला कर्मचारी के लिए है, जिसके दो से कम जीवित बच्चे हों।
इसका मतलब है कि दो या उससे अधिक जीवित बच्चों के बाद होने वाली अगली डिलीवरी पर सामान्य मैटरनिटी लीव का प्रावधान लागू नहीं होता।
मैटरनिटी लीव के दौरान कर्मचारी को नियमों के अनुसार वेतन के बराबर लीव सैलरी मिलती है। साथ ही यह छुट्टी सामान्य छुट्टी खाते से काटी नहीं जाती।
मिसकैरेज की स्थिति में अलग नियम
गर्भपात या मिसकैरेज की स्थिति में बच्चों की संख्या के आधार पर सामान्य मैटरनिटी लीव वाला प्रतिबंध उसी तरह लागू नहीं होता। ऐसे मामलों में पूरी सेवा अवधि के दौरान 45 दिन तक की छुट्टी का प्रावधान है, जो निर्धारित नियम और शर्तों के अधीन होती है।
सरोगेसी के मामलों में भी जुड़े प्रावधान
समय के साथ सरकारी सेवा नियमों में बदलाव किए गए हैं। 2024 में सरोगेसी से जुड़े मामलों के लिए भी मैटरनिटी और पैटरनिटी लीव से संबंधित प्रावधान जोड़े गए हैं। इसका उद्देश्य अलग परिस्थितियों में कर्मचारियों को निर्धारित नियमों के अनुसार छुट्टी की सुविधा उपलब्ध कराना है।
पुरुष सरकारी कर्मचारियों को कितनी पैटरनिटी लीव?
सरकारी कर्मचारियों के लिए सिर्फ महिला कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि पुरुष कर्मचारियों के लिए भी पैटरनिटी लीव का प्रावधान है।
नियमों के अनुसार पात्र पुरुष सरकारी कर्मचारी को 15 दिन की पैटरनिटी लीव मिल सकती है। इसके लिए कर्मचारी के दो से कम जीवित बच्चे होने की शर्त लागू होती है।
यह छुट्टी पत्नी की डिलीवरी से 15 दिन पहले से लेकर बच्चे के जन्म के छह महीने बाद तक निर्धारित अवधि में ली जा सकती है। पैटरनिटी लीव के दौरान कर्मचारी को पूरा वेतन मिलता है और यह छुट्टी सामान्य लीव खाते से नहीं काटी जाती।
चौथे बच्चे की मैटरनिटी लीव पर कोर्ट का फैसला क्यों अहम?
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के लिए मैटरनिटी लीव से जुड़े नियमों की अहमियत को सामने लाता है। मामले में कर्मचारी ने यह तर्क दिया था कि पहले तीन बच्चों के समय उन्होंने मैटरनिटी लीव नहीं ली थी, लेकिन कोर्ट ने मौजूदा नियमों के आधार पर चौथे बच्चे के लिए सामान्य मैटरनिटी लीव देने से इनकार कर दिया।
हालांकि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि हर परिस्थिति में महिला कर्मचारी को किसी भी प्रकार की छुट्टी से वंचित किया जाएगा। अलग-अलग परिस्थितियों के लिए सेवा नियमों में अलग प्रावधान मौजूद हैं। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग के सेवा नियम और कर्मचारी की परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं।
