नई दिल्ली:– गॉल ब्लैडर की पथरी (स्टोन) दुनिया भर में पाई जाने वाली पाचन तंत्र से संबंधित एक आम बीमारी है.
इससे पीड़ित कई लोगों में वर्षों तक कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन कुछ लोगों में यह गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है, जैसे तेज दर्द, संक्रमण, जॉन्डिस और में सूजन.
यदि समय रहते इसकी पहचान और सही उपचार कर लिया जाए, तो इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।
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गॉल ब्लैडर लिवर के नीचे स्थित एक छोटा थैलीनुमा अंग होता है. इसकी लंबाई लगभग 7 से 10 सेंटीमीटर होती है.
इसका मुख्य काम लिवर द्वारा प्रतिदिन बनाए जाने वाले बाइल (पित्त) को अस्थायी रूप से इकट्ठा करना होता है.
- गॉल ब्लैडर में पथरी कैसे बनती है?
पित्ताशय में मुख्य रूप से तीन तत्व होते हैं:
कोलेस्ट्रॉल
बाइल सॉल्ट्स
बिलीरुबिन
जब इन तीनों तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है, तो छोटे-छोटे क्रिस्टल बनने लगते हैं. समय के साथ ये क्रिस्टल बड़े होकर पथरी का रूप ले लेते हैं.
गॉल ब्लैडर में पथरी बनने की वजह-
पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होना
गॉल ब्लैडर का पूरी तरह से खाली न हो पाना
बिलीरुबिन का अत्यधिक उत्पादन होना
गॉल ब्लैडर में संक्रमण या सूजन होना
- गॉल ब्लैडर की पथरी कितने प्रकार की होती है?
- 1. कोलेस्ट्रॉल की पथरी
इस प्रकार की पथरी सबसे आम होती है, जो लगभग 80 प्रतिशत मामलों में बनती है.
- पिगमेंट पथरी
यह बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने के कारण बनती है. यह आमतौर पर लिवर की बीमारियों या कुछ खून से संबंधित बीमारियों में विकसित होती है.
- मिश्रित पथरी
यह कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम और बिलीरुबिन के मिश्रण से बनती है.
- सबसे अधिक ख़तरा किसे होता है?
डॉक्टर 5F फॉर्मूला को याद रखते हैं-
फीमेल: महिलाओं में यह समस्या अधिक होती है
फोर्टी: 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग
फैट : शरीर का अधिक वजन
फर्टाइल: ऐसी महिला जो गर्भवती हो सकती है
फेयर: पश्चिमी देशों में रहने वाले गोरी त्वचा वाले लोग
- अन्य जोखिम कारक क्या हैं?
मोटापा
शुगर
हाई कोलेस्ट्रॉल
गर्भावस्था
एस्ट्रोजन हार्मोन की दवाइयाँ
परिवार में पहले किसी को गॉल ब्लैडर की पथरी होना
लंबे समय तक व्रत रखना या भूखे रहना
तेजी से वजन कम होना
बहुत अधिक वसा वाला भोजन
कम फाइबर वाला भोजन
लिवर की बीमारियाँ
हीमोलिटिक एनीमिया
बढ़ती उम्र
भारत में गॉल ब्लैडर की पथरी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है. लगभग 5 से 15 प्रतिशत लोग अपने जीवन में कम से कम एक बार गॉल ब्लैडर की पथरी से पीड़ित हो सकते हैं.
यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में 2 से 3 गुना अधिक पाई जाती है और 40 वर्ष की उम्र के बाद इसका ख़तरा बढ़ जाता है.
यह समस्या युवाओं में भी देखी जाती है, जिसका मुख्य कारण बढ़ता मोटापा, व्यायाम में कमी और फास्ट फूड का अधिक सेवन हैं. - गॉल ब्लैडर की पथरी के लक्षण क्या हैं?
- अधिकतर लोगों में अल्ट्रासाउंड के दौरान संयोग से इस बीमारी का पता चलता है.
लक्षण कब दिखाई देते हैं?
पेट के दाहिने हिस्से में तेज दर्द
कंधे या पीठ तक फैलने वाला दर्द
वसा वाला भोजन खाने के बाद दर्द होना
घबराहट होना
उल्टियाँ
बदहजमी
पेट फूलना
गैस बनना
खतरे के संकेत
यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण हों, तो निश्चित रूप से अस्पताल जाना चाहिए:
बुखार
कंपकंपी होना
पीलिया
आँखों का पीला होना
पेशाब का गहरा रंग
सफेद या फीके रंग का मल
पेट में बहुत तेज दर्द
लगातार उल्टियाँ होना
- गॉल ब्लैडर की पथरी की जांच कैसे होती है?
अल्ट्रासाउंड: यह एक बहुत ही आसान, कम लागत वाला और बहुत सटीक टेस्ट है
खून की जाँच: सीबीसी, लिवर फंक्शन टेस्ट, सीरम बिलीरुबिन और लिवर एंजाइम्स की जाँच की जाती है
एमआरसीपी और सीटी स्कैन: बाइल डक्ट्स में पथरी का शक होने पर सीटी स्कैन या एमआरसीपी करवाया जाता है
ईआरसीपी: इसका उपयोग केवल पथरी का पता लगाने के लिए ही नहीं, बल्कि कुछ मामलों में पथरी निकालने के लिए भी किया जाता है
