राधा-कृष्ण!एक ऐसा नाम दो-होते हुए भी है एक आत्मा तो दूसरा-शरीर। एक बार श्री कृष्ण,राधा को छोड़कर चले गए ? क्या आत्मा शरीर के बिना रह सकती हैं तो कृष्ण कैसे रह सकते हैं,यह धार्मिक विषय हैं।
भाद्र की कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाया जाने वाला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव कोसा , कांसा एवं कंचन की नगरी चांपा के विभिन्न मंदिरों मे दुर्लभ संयोग के साथ मनाया जाता हैं । अंचल में आठें कन्हैया के नाम से प्रसिद्ध पावन पर्व जगदीश्वर भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण दिवस के रुप में मनाया जाता हैं ।बाल्यावस्था ईश्वर का दुसरा नाम हैं ।

भगवान का बाल रुप इतना मनोहारी हैं कि श्रद्धालु भक्त जन इनके इसी रुप शिशुवत बाल लीला आठों पहर शुद्ध मन से सोलह कलाओं युक्त भगवान् श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को जन्माष्टमी पर्व पर भगवान के रुपो की पूजा की जाती हैं। यहां पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से नगर के श्रद्धालु नवयुवकों की टोलियां गाजे-बाजे के साथ जन्माष्टमी पर्व विभिन्न स्थलों पर मटकियोंमेंदूध ,दही ,घी ,मिठाईयां ,फल और चाकलेट रख नाच-गाने के साथ मटकियां फोड़ते और बधाईयां देते हैं।
पूर्व पार्षद शशिप्रभा सोनी शांता गुप्ता ने बताया कि नगर में कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव बहुत ही श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता हैं । धर्मावलंबी पवित्र भावना से मंदिरों में उपासना के लिए जाते हैं।वास्तव में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव हमारे लिए एक प्रकार का आनंदोत्सव हैं । इस दिन कृष्णचंद्र भगवान का पूजा अर्चना करने से कई गुना ज्यादा पुण्य प्राप्त होता हैं । 5248 साल गुजर जाने के बाद भी भगवान श्री कृष्ण की लोकप्रियता एवं उनकी बाल लीला हम सबके लिए आकर्षण एवं अव्दितीय हैं । बाल रुप हैं सबको भाता, माखन चोर वो हैं कहलाता ! आला-आला गोविंदा आला, बाल ग्वालों ने शोर हैं मचाया !! झूम उठें हैं सब खुशियों में, देखों मुरली वाला हैं आया !!

शीला स्वर्णकार ने नन्हीं- शिवी बेटियां को भगवान श्रीकृष्ण के बाल रुप में सजाई इसी तरह शांता गुप्ता ने जुड़वां सुपुत्री दिव्या को कृष्ण और नव्या को राधा के रुप में सजाया और उसके सिर पर मोर शिषा स्थापित किया।डॉ अमित स्वर्णकार ने बताया कि जब भगवान बाल रुप में मुरली बजाते हैं मोर पंख धारण करके नाचते हैं तो यह रुप मोक्षदायक प्रिय होता हैं । सुपुत्री शिवी को इस रुप में सजाया और उसके समीप प्रिय वस्तुओं को रख शिवी चेहरे पर मंदमुस्कान देखकर हम सब ख़ुशी से झूमने लगे हैं ।
दर्शन करने लोग देखकर मंँत्रमुग्ध हो रहे हैं । साढ़े-सात महिनें की शिवी और दोनों जुड़वां बहनें दिव्या और नव्या बेटियां को देख आध्यात्मिक संबल मिलता हैं।भगवान कृष्ण मां के लाड़ले थे यशोदा मां लोरी गाती हुई दूध पिलाती हैं और कहती हैं ” कितनी बेर मोहि दूध पियत भइ यह अजहु मैं छोटे से!” यशोदा का कृष्ण के प्रति वात्सल्य और कृष्ण की बाल लीलाएं मनमोहक कृष्णचंद्र की कृपा बनी रहे जन्माष्टमी की मंगलकामनाएं ।