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    रीढ़ की हड्डी का दर्द कैसे ठीक करें जानें ये घरेलू उपचार…

    By Tv36 HindustanJuly 20, 2026No Comments8 Mins Read
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    नई दिल्ली:– आज की आधुनिक और गतिहीन जीवनशैली में पीठ या रीढ़ की हड्डी का दर्द एक बेहद आम समस्या बन चुकी है। आमतौर पर, मांसपेशियों में खिंचाव, मोच या गलत मुद्रा के कारण होने वाला पीठ दर्द कुछ समय में सामान्य हो जाता है। हालांकि, हर बार यह दर्द इतना साधारण नहीं होता है। यदि पीठ दर्द के साथ पैरों या अन्य अंगों में दर्द, झुनझुनी, सुन्नता या कमजोरी महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें। यह रीढ़ की हड्डी से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी जैसे कि डिस्क क्षति, गठिया या तंत्रिका संपीड़न (Nerve Compression) का संकेत हो सकता है।

    मांसपेशियों के खिंचाव और रीढ़ की जटिल समस्याओं के शुरुआती लक्षण काफी मिलते-जुलते होते हैं, इसलिए अक्सर लोग लगातार होने वाले दर्द को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। रीढ़ की हड्डी के दर्द के मूल कारणों को समझना और इसके शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचानना बेहद आवश्यक है, ताकि समय पर सही निदान और गैर-सर्जिकल उपचार विकल्पों की मदद से समस्या को गंभीर रूप लेने से रोका जा सके।

    आइए जानते हैं कि रीढ़ की हड्डी का दर्द क्यों होता है, रीढ़ की हड्डी के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार क्या है।

    रीढ़ की हड्डी या पीठ का दर्द क्या है?
    रीढ़ की हड्डी (पीठ) हमारे शरीर का वह केंद्रीय स्तंभ है जो न केवल पूरे शरीर का वजन संभालता है, बल्कि हमें चलने-फिरने, झुकने और बैठने की गतिशीलता भी प्रदान करता है। रीढ़ की हड्डी में होने वाला दर्द असल में डिस्क, मांसपेशियों, लिगामेंट्स या नसों में किसी अंदरूनी गड़बड़ी या चोट का लक्षण होता है।

    चिकित्सीय दृष्टिकोण से इस दर्द को उसकी अवधि और प्रकृति के आधार पर तीन भागों में बांटा जाता है:
    एक्यूट (4 सप्ताह से कम समय का दर्द)
    सब-एक्यूट (4 से 12 सप्ताह तक का दर्द)
    क्रॉनिक या दीर्घकालिक (12 सप्ताह से अधिक समय तक रहने वाला दर्द)
    रीढ़ की हड्डी में दर्द के मुख्य कारण (Causes of Spine Pain)
    रीढ़ की हड्डी में दर्द के कारणों को निम्नलिखित श्रेणियों के माध्यम से समझा जा सकता है:

    मांसपेशियों में खिंचाव या मोच
    रीढ़ की हड्डी में दर्द का सबसे प्राथमिक और आम कारण मांसपेशियों या लिगामेंट्स (स्नायुबंधन) में आने वाली मोच है। यह मुख्य रूप से अचानक कोई भारी वजन उठाने, गलत तरीके से झुकने, या पीठ में कोई अप्रत्याशित झटका लगने के कारण होती है। इसके कारण पीठ की मांसपेशियों में अचानक ऐंठन होने लगती है, जिससे उठने-बैठने और सामान्य रूप से खड़े होने की क्षमता प्रभावित हो जाती है।

    स्लिप डिस्क या हर्नियेटेड डिस्क
    हमारी रीढ़ की हड्डियों के बीच में रबर जैसे कुशन होते हैं जिन्हें डिस्क कहा जाता है। ये शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करते हैं। बढ़ती उम्र के साथ इन डिस्क की नमी कम होने लगती है, जिसे डीजेनेरेटिव डिस्क डिजीज कहते हैं। इस स्थिति में बाहर निकली हुई डिस्क (हर्नियेटेड डिस्क) आस-पास की नसों पर दबाव डालती है। इसके कारण कमर के निचले हिस्से से लेकर पैर तक तेज, चुभने वाला दर्द महसूस होता है, जिसे आम भाषा में साइटिका या लम्बर रेडिकुलोपैथी भी कहा जाता है।

    आर्थराइटिस और ऑस्टियोआर्थराइटिस
    उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों का दर्द रीढ़ की हड्डी को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। रीढ़ का ऑस्टियोआर्थराइटिस (स्पाइनल आर्थराइटिस) जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज (उपास्थि) को धीरे-धीरे घिस देता है। इसके अतिरिक्त, रीढ़ के फेसेट (Facet Joints) जोड़ों में सूजन आने से फेसेट आर्थ्रोपैथी (Facet Arthropathy) की स्थिति बन जाती है। इसके कारण रीढ़ की हड्डी में गंभीर अकड़न पैदा हो जाती है, जो विशेष रूप से सुबह के समय अधिक महसूस होती है। रीढ़ की हड्डियों के बीच का लचीलापन कम होने पर शरीर कभी-कभी अतिरिक्त हड्डियां विकसित कर लेता है जिन्हें बोन स्पर्स कहते हैं। ये बोन स्पर्स आसपास की नसों को दबाने या संकुचित करने लगते हैं।
    यह रीढ़ की हड्डी के भीतर होने वाली एक संरचनात्मक समस्या है जो मुख्य रूप से युवाओं या बुजुर्गों में देखी जाती है। यह डिस्क के घिसने और आर्थराइटिस या लिगामेंट्स के मोटे होने की वजह से रीढ़ की हड्डी के अंदर की नली के संकुचित होने के कारण होती है। इस संकुचन के कारण स्पाइनल कॉर्ड और नसों पर निरंतर दबाव बनता है। इससे प्रभावित मरीजों को ज्यादा देर खड़े रहने या चलने पर पैरों में भारीपन, सुन्नपन, कमजोरी और पीठ के निचले हिस्से में तीव्र दर्द का सामना करना पड़ता है।

    खराब पॉश्चर और गतिहीन जीवनशैली
    आधुनिक जीवनशैली में रीढ़ की हड्डी के दर्द का एक बड़ा कारण हमारी दैनिक आदतें है। यह ऑफिस में घंटों तक बिना ब्रेक लिए गलत तरीके से बैठकर लैपटॉप पर काम करने, लगातार मोबाइल स्क्रीन की तरफ गर्दन झुकाए रखने और शारीरिक निष्क्रियता के कारण होता है। लंबे समय तक खराब पोस्चर में रहने से रीढ़ की प्राकृतिक वक्रता (Curve) पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और रीढ़ की हड्डी में समय से पहले संरचनात्मक विकृतियां जैसे कि काइफोसिस (कूबड़ निकलना) या डिस्क का सिकुड़ना शुरू हो जाता है।

    इन मुख्य कारणों के अलावा, स्पॉन्डिलोलाइसिस (Spondylolysis) जिसमें रीढ़ की हड्डी के एक हिस्से में स्ट्रेस फ्रैक्चर या दोष विकसित हो जाता है, एक हड्डी का दूसरी हड्डी के ऊपर खिसक जाना (Spondylolisthesis), रीढ़ का एक तरफ झुक जाना (Scoliosis), या दुर्लभ मामलों में रीढ़ की हड्डी में कोई इन्फेक्शन या ट्यूमर भी इस दर्द के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

    कैल्शियम और विटामिन D3 की कमी
    ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) के जोखिम कारकों में कैल्शियम और विटामिन D की कमी, बढ़ती उम्र, हार्मोनल बदलाव, शारीरिक निष्क्रियता और कुछ चिकित्सीय स्थितियां शामिल हैं। यदि शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी है, तो बिना खान-पान और पोषण में सुधार किए बिना कोई भी घरेलू उपाय या दवा लंबे समय तक काम नहीं करती है।

    गलत गद्दे का चयन
    आपकी रीढ़ की सेहत आपके बिस्तर पर भी निर्भर करती है। बहुत अधिक गद्देदार या बहुत अधिक कड़क गद्दे रीढ़ के प्राकृतिक संरेखण को बिगाड़ देते हैं, जो आगे चलकर रीढ़ की हड्डी के पुराने दर्द का कारण बनता है। इसलिए हमेशा ऑर्थोपेडिक या सही सपोर्ट देने वाले गद्दे का ही चुनाव करें
    रीढ़ की हड्डी के दर्द के मुख्य लक्षण
    रीढ़ की हड्डी के दर्द से जुड़े लक्षणों को सही समय पर पहचानना बेहद जरूरी है। अक्सर लोग इसे सामान्य मांसपेशियों का खिंचाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ लक्षण सीधे तौर पर रीढ़ की हड्डी की गंभीर समस्या की ओर इशारा करते हैं। इसके मुख्य लक्षणों को इन तीन श्रेणियों में समझा जा सकता है:

    सामान्य लक्षण
    पीठ या कमर में लगातार दर्द होना जो हफ्तों या महीनों (4 से 6 सप्ताह से अधिक) तक बना रहता है और समय के साथ इसकी तीव्रता बढ़ती जाती है।
    रीढ़ की हड्डी में अकड़न महसूस होना, जिसके कारण झुकने, सीधे खड़े होने, उठने या चलने-फिरने में कठिनाई होती है।
    दर्द के कारण नींद प्रभावित हो जाती है और रोजमर्रा की सामान्य गतिविधियों को पूरा करने में असमर्थता महसूस होती है।
    नसों से जुड़े लक्षण
    जब रीढ़ की हड्डी की समस्या नसों पर दबाव बनाने लगती है, तो निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं:

    रेडिकुलोपैथी और साइटिका: दर्द का केवल पीठ तक सीमित न रहकर कूल्हों से होते हुए पैरों या हाथों तक फैलना।
    सुन्नता और झुनझुनी: अंगों (हाथों या पैरों) में चींटियां चलने जैसी झुनझुनी होना, सुन्नपन आना या संवेदना की कमी महसूस होना।
    मांसपेशियों की कमजोरी: रीढ़ से जुड़ी नसों में खिंचाव या दबाव के कारण हाथों-पैरों की मांसपेशियों में कमजोरी आना, जिससे संतुलन बनाने में भी दिक्कत हो सकती है।
    रीढ़ की हड्डी के दर्द के घरेलू उपचार
    रीढ़ की हड्डी में दर्द होने पर अक्सर लोग पूरी तरह से बेड रेस्ट करने का फैसला कर लेते हैं। हालांकि, जब तक गंभीर स्थिति न हो, बिस्तर पर लेटे रहने के बजाय हल्की और सुरक्षित शारीरिक गतिविधियां रीढ़ की हड्डी को जल्द ठीक होने में मदद करती हैं।

    यदि आपका दर्द शुरुआती स्तर पर है, तो रीढ़ की हड्डी में दर्द के इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लेने के साथ-साथ आप नीचे दिए गए असरदार घरेलू उपायों को अपना सकते हैं:

    हॉट एंड कोल्ड थेरेपी
    रीढ़ की हड्डी में दर्द के शुरुआती 48 घंटों के भीतर बर्फ की सिकाई करनी चाहिए, जिससे सूजन और दर्द की तीव्रता कम हो जाती है। इसके अतिरिक्त, जकड़न को दूर करने और मांसपेशियों को आराम देने के लिए हीटिंग पैड या गर्म पानी की थैली से सिकाई करें।

    हर्बल तेलों से हल्की मालिश
    पीठ की मांसपेशियों के तनाव को कम करने के लिए हर्बल तेलों का उपयोग बेहद फायदेमंद माना जाता है। आप सरसों के तेल में लहसुन और अजवाइन पकाकर तैयार किए गए तेल से पीठ की हल्की मालिश कर सकते हैं। ध्यान रखें मालिश हमेशा बेहद हल्के हाथों से करें और रीढ़ की हड्डी पर सीधा और तेज दबाव बनाने से बचें।

    स्ट्रेचिंग और हल्का व्यायाम
    रीढ़ की हड्डी में लचीलापन और मजबूती बनाए रखने के लिए गहरी सांस लेने की तकनीकों के साथ कुछ सुरक्षित योगासन और स्ट्रेचिंग करनी चाहिए। इसमें कैंट-काउ स्ट्रेच और पेल्विक टिल्ट जैसे हल्के व्यायाम शामिल हैं, जो पीठ के निचले हिस्से के तनाव को दूर करते हैं।

    हल्दी और अदरक का सेवन
    हल्दी और अदरक अपने प्राकृतिक औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं। हल्दी में मौजूद ‘करक्यूमिन’ और अदरक में पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में प्राकृतिक पेनकिलर की तरह काम करते हैं। आप रोज़ाना दूध में हल्दी मिलाकर या अदरक की चाय का सेवन करके रीढ़ की हड्डी की आंतरिक सूजन और दर्द को कम कर सकते हैं।

    एर्गोनॉमिक्स में सुधार
    लंबे समय तक गलत पोस्चर में बैठने से रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे बचने के लिए अपने बैठने के तरीके में सुधार करें। बैठते समय पीठ के निचले हिस्से को सहारा देने के लिए छोटा तकिया या लम्बर सपोर्ट लगाएं। इसके अलावा, लगातार कई घंटों तक बैठने से बचें और हर 30 मिनट में एक छोटा ब्रेक लेकर वॉक ज़रूर करें।

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