नई दिल्ली:– शादी का वादा कर लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी के खिलाफ दर्ज FIR और पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि केवल बाद में शादी से इनकार कर देना रेप का आधार नहीं बन सकता, जब तक यह साबित न हो कि आरोपी ने शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा किया था।
मामला साल 2016 का है। शिकायतकर्ता महिला की मुलाकात आरोपी से एक शादी समारोह में हुई थी। दोनों के बीच दोस्ती के बाद प्रेम संबंध बने और बाद में शारीरिक संबंध भी स्थापित हुए। महिला का आरोप था कि आरोपी ने शादी का भरोसा देकर गिरिडीह और रांची के होटल में उसके साथ संबंध बनाए।
महिला के मुताबिक, दोनों करीब सात साल तक रिश्ते में रहे। अप्रैल 2023 में आरोपी ने कथित तौर पर फोन बंद कर दिया और बाद में उसके परिवार ने भी शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने IPC की धारा 376 के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।
मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने कहा कि शादी का वादा तभी ‘झूठा वादा’ माना जाएगा, जब उसे करते समय ही आरोपी की शादी करने की कोई मंशा न हो। इस मामले में ऐसा साबित करने वाली कोई ठोस सामग्री सामने नहीं आई।
कोर्ट ने लंबे समय तक चले रिश्ते को भी ध्यान में रखा और आरोपी के खिलाफ FIR, संज्ञान आदेश तथा पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
अदालत ने साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाना अपराध नहीं है। अगर शुरुआत से ही शादी करने की मंशा नहीं थी और धोखे से संबंध बनाए गए, तो मामला अलग हो सकता है।
