छत्तीसगढ़:- गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में बीए-एलएलबी के छठवें सेमेस्टर के पेपर लीक मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है. मई में आयोजित परीक्षा को विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से रद्द कर दिया गया है. फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय ने 27 जुलाई से दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया है. इसके लिए री-शेड्यूल भी जारी कर दिया गया गया है.
परीक्षा रद्द होने की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में छात्र प्रशासनिक भवन पहुंच गए. जहां पर छात्रों ने दोबारा परीक्षा होने के विरोध में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की. इतना ही नहीं उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की है. छात्रों का कहना है कि यदि पेपर लीक हुआ है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी छात्रों को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है.
डेढ़ महीने बाद भी कार्रवाई नहीं
वहीं पेपर लीक की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने 6 जून को अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी थी. इसके बावजूद करीब डेढ़ महीने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब अचानक परीक्षा निरस्त करने के फैसले पर छात्र सवाल उठा रहे हैं. जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि समर्थ पोर्टल हैक नहीं हुआ था, बल्कि लॉगिन आईडी और पासवर्ड का उपयोग कर प्रश्नपत्र और अन्य डेटा तक पहुंच बनाई गई थी. कमेटी ने मामले की पुलिस जांच कराने की भी सिफारिश की है. इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभागीय जांच समिति का गठन किया है.
एचओडी को पद से हटाया गया
इस मामले में पहले ही लॉ विभाग के तत्कालीन एचओडी और डीन प्रो. सुधांशु रंजन मोहापात्रा को पद से हटाया जा चुका है. उनकी जगह प्रो. प्रवीण मिश्रा को लॉ विभाग का नया एचओडी और डीन नियुक्त किया गया है. दोबारा परीक्षा के खिलाफ छात्रों ने रजिस्ट्रार प्रो. अश्वनी दीक्षित से मुलाकात कर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, दोबारा होने वाली परीक्षा के फैसले पर पुर्निविचार करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है.
लगातार कार्रवाई की जा रही
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्विद्यालय के जन संपर्क विभाग के अधिकारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि जब यह सूचना मिली थी, तब विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया था और उसे एक सप्ताह का समय दिया गया था. कमेटी ने निर्धारित समय के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी थी. इसके बाद रिपोर्ट को विश्वविद्यालय की प्रक्रिया के अनुसार विद्या परिषद की स्थायी समिति के समक्ष रखा गया, जहां समिति ने रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया. इसके आधार पर लगातार आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.
जांच के बाद ही निर्णय लिए गए
उन्होंने आगे कहा कि मुख्य रूप से, अब समर्थ पोर्टल में लॉगिन प्रक्रिया OTP आधारित कर दी गई है. इससे सुरक्षा का पहला स्तर और अधिक मजबूत हो गया है. इसके अलावा, रिपोर्ट के आधार पर अन्य निर्णय भी लिए गए हैं और आवश्यक जांच समितियों का गठन किया गया है. मामले में लगातार चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि यह मामला संवेदनशील है और बड़ी संख्या में छात्रों से जुड़ा हुआ है, इसलिए जवाबदेही तय करने से पहले सभी तथ्यों का अत्यंत सूक्ष्मता और गंभीरता से परीक्षण किया गया है. सभी पहलुओं की जांच के बाद ही संबंधित निर्णय लिए गए हैं.
