छत्तीसगढ़:- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में व्यक्तिगत आयकर और पर्सनल फाइनेंस से जुड़े विषयों को शामिल किया है। नए पाठ्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को न केवल आयकर की गणना समझाई जाएगी, बल्कि ईमानदारी से कर भुगतान को नागरिकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के तौर पर भी बताया जाएगा। NCERT की नई पुस्तक ‘Understanding Society India and Beyond – Part 2’ में विद्यार्थियों को व्यक्तिगत आयकर, कर स्लैब, बजट, बचत, निवेश और वित्तीय जोखिम प्रबंधन जैसे विषयों की जानकारी दी गई है। पुस्तक का पहला भाग जून में जारी किया गया था, जबकि दूसरा भाग नए शैक्षणिक सत्र के करीब छह महीने बाद जारी किया गया।
कक्षा 9 में पहली बार समझेंगे आयकर की गणना
NCERT प्रमुख दिनेश प्रसाद सकलानी के अनुसार, नए पाठ्यक्रम के तहत कक्षा 9 के विद्यार्थी कर स्लैब के आधार पर आयकर की वास्तविक गणना को समझ सकेंगे। इस आयु वर्ग के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम में व्यक्तिगत आयकर की गणना को शामिल करना एक नया पहलू है। पाठ्यपुस्तक में बताया गया है कि भारत में आयकर की गणना स्लैब प्रणाली के आधार पर की जाती है। विद्यार्थियों को नई कर व्यवस्था के अंतर्गत लागू कर स्लैब को उदाहरण और चार्ट के माध्यम से समझाया गया है।
नई कर व्यवस्था की भी दी जाएगी जानकारी
पुस्तक में नई आयकर व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों की बुनियादी जानकारी भी दी गई है। पाठ्यक्रम में बताया गया है कि नई कर व्यवस्था को 1 अप्रैल 2023 से डिफॉल्ट टैक्स व्यवस्था बनाया गया था। इसके तहत करदाता नई व्यवस्था में शामिल माने जाते हैं, जब तक वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुरानी कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनते।इस तरह विद्यार्थियों को स्कूल स्तर पर ही आयकर से जुड़ी बुनियादी अवधारणाओं और कर व्यवस्था को समझने का अवसर मिलेगा।
पर्सनल फाइनेंस के पांच अहम पहलुओं पर फोकस
NCERT की पुस्तक में केवल टैक्स की गणना तक ही जानकारी सीमित नहीं रखी गई है। इसमें पर्सनल फाइनेंस के प्रमुख पहलुओं को भी शामिल किया गया है।
विद्यार्थियों को व्यक्तिगत वित्त के तहत मुख्य रूप से इन विषयों के बारे में बताया जाएगा:
आय और आमदनी का प्रबंधन
बजट और खर्चों की योजना
बचत का महत्व
निवेश की बुनियादी जानकारी
वित्तीय सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन
पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कम उम्र से ही पैसों के सही प्रबंधन और वित्तीय निर्णयों के दीर्घकालिक प्रभाव को समझने में मदद करना है।
FD से लेकर म्यूचुअल फंड तक निवेश की जानकारी
पुस्तक में शुरुआती निवेश की अहमियत पर भी चर्चा की गई है। विद्यार्थियों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), बॉन्ड, स्टॉक और म्यूचुअल फंड जैसे विभिन्न निवेश विकल्पों की बुनियादी जानकारी दी गई है। पाठ्यपुस्तक में यह समझाने की कोशिश की गई है कि व्यक्ति आज जो वित्तीय निर्णय लेता है, उसका असर भविष्य की आर्थिक स्थिति और वित्तीय स्थिरता पर पड़ सकता है।
कम उम्र में वित्तीय समझ विकसित करने पर जोर
NCERT के नए पाठ्यक्रम में आयकर और पर्सनल फाइनेंस को शामिल करने से विद्यार्थियों को रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विषयों को स्कूल स्तर पर समझने का अवसर मिलेगा। आय, खर्च, बचत, निवेश और टैक्स जैसी अवधारणाओं की शुरुआती जानकारी भविष्य में वित्तीय निर्णय लेने की समझ विकसित करने में उपयोगी हो सकती है।
