मध्यप्रदेश:– गुरु-शिष्य परंपरा का पवित्र पर्व गुरु पूर्णिमा रविवार को है। इतिहास गवाह है कि विविध क्षेत्रों में सफल रहे लोगों के पीछे उनके गुरुओं का मार्गदर्शन और आशीर्वाद रहा है। सनातन काल से ही गुरु अपने शिष्यों की कठिन राह को आसान करने के विविध प्रयास करते रहे हैं। वर्तमान आधुनिक युग में भी शिक्षा के क्षेत्र में कुछ गुरु ऐसे भी हैं, जो अपनी अलग कार्यप्रणाली और नवाचारों से शिष्यों का बेहतर मार्गदर्शन कर रहे हैं। कठिन विषयों के फार्मूलों को सरल बनाकर उनका मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
मैदान पर गणित की आकृतियां बनाकर उनका सरलीकरण कर छात्राओं को पढ़ाते हुए शिक्षक विजेंद्रसिंह गुर्जवार।
बड़वानी जिले में भी ऐसे शिक्षक हैं, जो अपनी अलग शिक्षा कला से विशेष पहचान बना रहे हैं। कोई जमीन, टेबल और दीवारों पर आकृति बनाकर बच्चों को गणित की सरल विधियां बता रहा है तो कोई पेड़ पर चढ़कर, खेत में जाकर या बंद कमरे में प्रकृति, पर्यावरण और सौरमंडल में होने वाली गतिविधियों को प्रत्यक्ष प्रमाण के साथ पढ़ा रहा है। वहीं नक्षत्र वाटिका से बच्चों को सौर मंडल की प्रत्यक्ष यात्रा कराकर प्रकृति का इतिहास, भूगोल पढ़ा रहे हैं।
कक्षा में अंधेरा कर टार्च के माध्यम से सूर्य और चंद्र ग्रहण को समझाते हुए शिक्षक शफीक शेख।
जमीन, टेबल और दीवारों पर आकृति बनाकर गणित का सरलीकरण कर पढ़ा रहे
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भवती स्कूल के शिक्षक विजेंद्रसिंह गुर्जवार द्वारा गणित के कठिन फार्मूलों को सरल तरीके पढ़ाया जा रहा हैं। उन्होंने बताया कि ग्रीष्म अवकाश में इनके चार्ट बनाकर संक्षिप्त कंटेंट तैयार किया। इससे समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके तहत स्कूल में गणित का एक विशेष कक्ष तैयार किया गया है। स्कूल मैदान पर जमीन पर आकृति बनाकर गणित के कुछ फार्मूले बताए गए तो कक्ष में चिपकाए गए चार्ट और बनाई गई आकृतियों से पढ़ाया जा रहा है। जमीन, टेबल और दीवारों पर बनाई आकृतियों से समझा रहे हैं।
नक्षत्र वाटिका के चार्ट के माध्यम से छात्राओं को पढ़ाते हुए शिक्षक डा. मोहिनी शुक्ला।
बंद कमरे में टार्च की रोशनी से बताया कैसे होता है सूर्य एवं चंद्र ग्रहण
शासकीय स्कूल भवती के ही कृषि विषय के शिक्षक शफीक शेख भी विद्यार्थियों को विविध प्रायोगिक तरीकों से आसान विधि से पढ़ा रहे हैं। बंद कमरे में टार्च की रोशनी में सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के एक-दूसरे के मध्य में आने से लगने वाले सूर्य और चंद्र ग्रहण की जानकारी दी। पौधों के अपना भोजन बनाने एवं वाष्पीकरण की विधि को पेड़ों पर चढ़कर थैली बांधकर बताया।
विद्यार्थियों को खेतों में ले जाकर खेती किसानी कैसे होती है और प्रकृति का इस पर कैसा प्रभाव पढ़ता है इसकी जानकारी दे रहे हैं। ये शिक्षक अपने विषय के तथ्यों को विविध उदाहरणों से प्रैक्टिल के माध्यम से समझा रहे हैं। यही कारण है कि इस स्कूल की छात्रा दीपिका दशरथ सोलंकी जिले की टापर रही है।
नक्षत्र वाटिका से सौर मंडल, नक्षत्रों और पर्यावरण की पढ़ाई
शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय की शिक्षिका डा. मोहिनी शुक्ला भी अपने अनूठे तरीके से बच्चों को पढ़ा रही हैं। स्कूल में उन्होंने नक्षत्रों के हिसाब से आकर्षक वाटिका तैयार की। इस वाटिका के माध्यम से नक्षत्रों और गृहों के अनुरूप रहने वाले पेड़ -पौधे, सौर मंडल और पर्यावरण का पाठ पढ़ा रही हैं कक्षों की दीवारों पर भी विशेष चार्ट बनाए हैं। इन्हें देखकर विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं।
विलुप्त औषधीय पौधों की वाटिका बनाकर दे रहीं प्रभावी शिक्षा
प्रधानमंत्री काॅलेज आफ एक्सीलेंस काॅलेज की प्राचार्य एवं वनस्पति संकाय विभागाध्यक्ष डाॅ. वीणा सत्य ने भी काॅलेज परिसर में सतपुड़ा में विलुप्त हो रही औषाधीय पौधों की वाटिका तैयार की है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को सतपुड़ा के जंगल में पाई जाने वाले विलुप्तप्राय औषधियों को दिखाकर इसका महत्व बताकर प्रभावी शिक्षा दी जा रही हैं।
