गुवाहाटी, असम की प्रख्यात नृत्यांगना और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित गरिमा हजारिका का निधन हो गया। उनके परिवार के लोगों ने यह जानकारी दी। वे वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। वह 83 वर्ष की थीं। उनके परिवार में उनका बेटा, बहू और एक पोता है। पति कृष्णमूर्ति हजारिका भी प्रख्यात शास्त्रीय नर्तक थे।
गरिमा हजारिका ओडिसी और कथक नृत्य विधा में भी कुशल थीं। शास्त्रीय नृत्य परंपरा के तहत सत्रिया नृत्य विधा पहले ‘सत्रा या वैष्णव मठों तक ही सीमित थी और पुरुषों द्वारा इस नृत्य का अभ्यास किया जाता था। हजारिका ने नृत्य की इस परंपरा को दुनिया तक ले जाने और महिलाओं के बीच इसे लोकप्रिय बनाया। उन्होंने इसे मंच पर प्रदर्शन करने के लिए प्रशिक्षित करने के वास्ते प्रख्यात विद्वान महेश्वर निओग की मदद से अथक प्रयास किया था।हजारिका को मंच के लिए अधिक उपयुक्त रूप में सत्रिया नृत्य के लिए वेशभूषा डिजाइन करने का भी श्रेय दिया जाता है।
हजारिका ने बहुत छोटी उम्र से ही गुरु चारु बोरदोलोई से कथक सीखना शुरू कर दिया था और बाद में कमलाबाड़ी सत्र के गुरु रोशेश्वर सैकिया और बोरबयान घाना कांता बोरा से सत्रिया की बारीकियां सीखी।
उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ आर्ट में पढ़ाई की और 1968 तक राष्ट्रीय राजधानी में रहीं। हजारिका 16 असमिया फिल्मों में नृत्य निर्देशक थीं। वह राज्य के विभिन्न थिएटर में कोरियोग्राफी, स्टेज और कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग में सक्रिय रूप से शामिल थीं और प्रदर्शन के लिए 16 नृत्य नाटकों की रचना की।