मध्यप्रदेश:- कुपोषण के खिलाफ सरकार लगातार अभियान चला रही है. बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं. लेकिन विदिशा जिले से सामने आई स्थिति सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखा रही है. आरोप हैं कि जिले में पिछले दो से तीन महीनों से टेक होम राशन (THR) यानी पोषण आहार का वितरण प्रभावित है. इसका असर सीधे उन बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें सबसे अधिक पोषण की आवश्यकता होती है. चिंताजनक बात यह है कि यह समस्या केवल विदिशा तक सीमित नहीं है, बल्कि आठ जिलों में पोषण आहार आपूर्ति ठप होने की बात सामने आई है.
कुपोषण मुक्त प्रदेश के दावों के बीच बड़ा सवाल
प्रदेश सरकार कुपोषण समाप्त करने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है. आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को नियमित रूप से पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है. इसके लिए विशेष बजट, मॉनिटरिंग सिस्टम और जमीनी स्तर तक तंत्र विकसित किए गए हैं. लेकिन विदिशा जिले में सामने आई स्थिति ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. लाभार्थियों का आरोप है कि पिछले दो से तीन महीनों से उन्हें टेक होम राशन नहीं मिला है. वे लगातार आंगनवाड़ी केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें आपूर्ति नहीं आने की जानकारी दी जा रही है.
कागजों पर योजनाएं, जमीनी स्तर पर इंतजार
पोषण आहार सरकार की उन प्रमुख योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण रोकना और गर्भवती महिलाओं को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराना है. हालांकि, कई क्षेत्रों से सामने आ रही शिकायतों के अनुसार वास्तविक लाभार्थी समय पर सामग्री नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं. ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं का कहना है कि महीनों से वितरण बंद है और उन्हें किसी निश्चित तिथि की जानकारी भी नहीं दी जा रही. इस स्थिति ने लाभार्थियों की चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ा दी हैं.
सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे और गर्भवती महिलाएं
स्वास्थ्य विभाग खुद इस बात का प्रचार-प्रसार करता है कि जीवन के शुरुआती वर्षों में पर्याप्त पोषण न मिलने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसी प्रकार गर्भवती और धात्री महिलाओं को संतुलित पोषण नहीं मिलने पर मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में टेक होम राशन जैसी महत्वपूर्ण योजना का महीनों तक प्रभावित रहना केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है.
हितग्राहियों में बढ़ रही नाराजगी
लाभार्थी महिलाओं का कहना है कि पहले नियमित रूप से पोषण आहार मिलता था, लेकिन पिछले कई सप्ताहों से वितरण पूरी तरह बंद है. कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और बच्चों को मिलने वाला यह पोषण आहार उनके दैनिक भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा था. वितरण बाधित होने से परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है. महिलाओं का कहना है कि वे बार-बार जानकारी लेने जा रही हैं, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा.
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी स्वीकार की समस्या
मामले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब स्वयं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी पोषण आहार नहीं मिलने की बात स्वीकार कर रही हैं. नाम उजागर न करने की शर्त पर उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों से केंद्रों तक टेक होम राशन के पैकेट नहीं पहुंच पाए हैं. इस संबंध में अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक आपूर्ति सामान्य नहीं हो सकी है. कार्यकर्ताओं का कहना है कि लाभार्थियों के सवालों का उनके पास भी कोई ठोस जवाब नहीं है.
सिर्फ विदिशा नहीं, आठ जिलों में प्रभावित आपूर्ति
जानकारी के अनुसार यह समस्या केवल विदिशा जिले तक सीमित नहीं है. विदिशा, रायसेन, सागर, छतरपुर, दमोह, टीकमगढ़, पन्ना और निवाड़ी जिले में भी टेक होम राशन की आपूर्ति प्रभावित बताई जा रही है. इन जिलों में हजारों गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं और लाखों बच्चे इस योजना से जुड़े हुए हैं. ऐसे में लंबे समय तक आपूर्ति रुकना व्यापक स्तर की प्रशासनिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है
सिर्फ विदिशा नहीं, आठ जिलों में प्रभावित आपूर्ति
जानकारी के अनुसार यह समस्या केवल विदिशा जिले तक सीमित नहीं है. विदिशा, रायसेन, सागर, छतरपुर, दमोह, टीकमगढ़, पन्ना और निवाड़ी जिले में भी टेक होम राशन की आपूर्ति प्रभावित बताई जा रही है. इन जिलों में हजारों गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं और लाखों बच्चे इस योजना से जुड़े हुए हैं. ऐसे में लंबे समय तक आपूर्ति रुकना व्यापक स्तर की प्रशासनिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.
विभाग ने माना वितरण नहीं हो पाया
महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी विनीता लोड़े ने स्वीकार किया कि पिछले दो महीनों से पोषण आहार के पैकेटों का वितरण नहीं हो सका है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को अन्य सुविधाएं और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. विभाग का कहना है कि समस्या आपूर्ति एजेंसी के स्तर पर उत्पन्न हुई है और इसे दूर करने के प्रयास जारी हैं. विभाग का दावा है कि जल्द ही पोषण आहार की नियमित सप्लाई शुरू कर दी जाएगी.
करोड़ों खर्च के बावजूद व्यवस्था क्यों लड़खड़ाई?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कुपोषण उन्मूलन सरकार की प्राथमिकता में शामिल है, तब सप्लाई चेन में आई इस रुकावट को समय पर क्यों नहीं सुधारा गया. यदि विभाग को पहले से जानकारी थी तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई? और यदि समस्या कई जिलों में थी तो प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए आपात कदम क्यों नहीं उठाए गए? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब लाभार्थी और समाज दोनों जानना चाहते हैं.
कुपोषण के खिलाफ लड़ाई की सबसे कमजोर कड़ी
मध्यप्रदेश लंबे समय से कुपोषण की समस्या से जूझ रहा है. सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन पोषण आहार जैसी मूलभूत व्यवस्था का बाधित होना पूरे अभियान पर असर डाल सकता है. आठ जिलों में महीनों से पोषण आहार का वितरण न होना यह संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी और आपूर्ति तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है. फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि विभाग कब तक आपूर्ति बहाल कर पाता है और उन लाखों बच्चों व माताओं तक पोषण पहुंचा पाता है, जिनके लिए यह योजना जीवन और स्वास्थ्य से सीधे जुड़ी हुई है.
