नई दिल्ली:– शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित ये नौ दिन बहुत ही खास होते हैं। कहा जाता है कि इन दिनों मां स्वयं पृथ्वी लोक पर आ कर अपने भक्तों के कष्ट हरती हैं। ऐसे में मां के नौ स्वरूपों का बहुत ही विशेष रूप से पूजन किया जाता है। मां की चौकी सजाई जाती है, हवन-कीर्तन किया जाता है तो वहीं कुछ भक्त नौ दिनों के लिए अखंड जोत भी प्रज्वलित करते हैं। दरअसल हमारे शास्त्रों में दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है। खासतौर से आटे से बने हुए दीपक को बहुत ही शुभ माना गया है। कहते हैं कि आटे का दीपक जलाने से घर में सुख शांति और समृद्धि का आगमन होता है। तो चलिए जानते हैं इसे बनाने और लगाने का सही तरीका।
नवरात्रि के लिए आटे का दीया बनाते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे पहले बारी आती है आटे को गूंथने की। गेंहू के आटे को गंगाजल मिले हुए पानी से गूंथ लें। आटा ना ज्यादा मुलायम रखें ना ही बहुत सख्त। जब बिना हाथों में चिपके इसकी लोई आराम से बन जाए तब ये आटा बिल्कुल ठीक है। आटे में आप थोड़ी सी हल्दी भी मिला लें ताकि आटे का रंग सफेद ना लगे। अब बारी है दीए को आकार देने की।
दीया बनाने के लिए छोटी सी लोई लें। अब उसे हाथों से एकदम गोल शेप दें। अब इस गोले के बीचों-बीच अंगूठे की मदद से एक गड्ढा बनाएं और किनारों को ऊपर उठाते हुए दीए का आकार दें। आप चाहें तो इसके लिए एक आसान सा हैक भी ट्राई कर सकती हैं। लोई को एकदम गोल-गोल आकार देने के बाद आप किसी गहरे ढक्कन की मदद से भी उसे दीए जैसी शेप से सकते हैं। इसे हल्का सा सूखने के लिए छोड़ दें और लीजिए बनकर तैयार है आपका स्पेशल दिया। अब इसमें गाय का शुद्ध देसी घी और रूई की बाती डालकर माता रानी के लिए प्रज्वलित करें।
इस्तेमाल का सही तरीका और फायदे
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आटे का दीपक बहुत ही शुभ माना जाता है। खासतौर से नवरात्रि के दौरान तो इसका महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। नवरात्रि के नौ दिन शाम के समय माता रानी की पूजा के लिए आप इस दीए को प्रज्वलित कर सकते हैं। घर के मुख्य दरवाजे और तुलसी के पौधे के पास एक-एक दीया लगा सकते हैं। इसके फायदों की बात करें तो कहा जाता है कि आटे का दीया जलाने से घर में सकारात्मकता का माहौल बना रहता है। इसे जलाने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है जिससे घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती। इसके अलावा पारिवारिक रिश्तों में भी मिठास घुली रहती है।
