पटना: बिहार में जातिगत गणना रिपोर्ट पर सियासत तेज है। सत्ताधारी दल के नेता इसके फायदे बताने से थक नहीं रहे हैं। दूसरी ओर विपक्षी पार्टियां सर्वे रिपोर्ट को फर्जी करार दे रही हैं। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने इसे नीतीश कुमार का अंतिम सियासी दांव करार दिया है। उन्होंने कहा कि जब इंसान चारों ओर से थक जाता है या घिर जाता है तो अंतिम दांव चलता है। नीतीश कुमार भी जातिगत सर्वे के नाम पर अंतिम दांव चला है। हालांकि इससे नीतीश कुमार की पार्टी और I.N.D.I.A गठबंधन को विशेष लाभ नहीं होगा। लोकसभा चुनाव 2024 में जेडीयू के पांच सांसद भी नहीं जीतेंगे।
जातिगत गणना नीतीश का अंतिम दांव
एक न्यूज चैनल से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जो लोग जातीय गणना करवा लिए, इनको समाज की बेहतरी से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि जातिगत गणना को अंतिम दांव के रूप में खेला गया है, ताकि समाज के लोगों को जातियों में बांटकर एक बार फिर किसी तरह चुनाव की नैया पार लग जाए। बिहार में लगभग 32 वर्षों से लालू यादव और नीतीश कुमार की सरकार है। नीतीश कुमार 17 वर्षों से सत्ता में हैं। क्या नीतीश कुमार बता सकते हैं कि 17 वर्ष के बाद जातीय गणना क्यों करवाए? नीतीश कुमार को 17 वर्षों से याद नहीं आ रहा था। प्रशांत किशोर ने कहा कि दूसरी बात ये है कि जातिगण गणना राज्य सरकार का विषय नहीं है। सर्वे के नाम पर समाज को बांटा जा रहा है।
नहीं सुधरेगी बिहार के लोगों की स्थिति
प्रशांत किशोर ने कहा कि I.N.D.I.A के नेता कह रहे हैं कि जातियों की गणना से लोगों की स्थिति सुधरेगी। संख्या के हिसाब से हिस्सेदारी तय होगी। तो क्या नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में बदलाव करेंगे। संख्या के हिसाब से हिस्सा देंगे… शायद नहीं। उन्होंने कहा कि जातियों की गणना मात्र से लोगों की स्थिति नहीं सुधरेगी। पीके ने कहा कि सरकार के पास आंकड़ा पहले से है। बिहार के कितने लोग गरीब और पिछड़े हैं, ये जानकारी सरकार के पास है। क्यों नहीं सुधारते हैं?
प्रशांत किशोर ने कहा कि दलितों की गणना आजादी के बाद से ही हो रही है। उसकी दशा क्यों नहीं सुधार रहे हैं। उसके लिए नीतीश कुमार और लालू-राबड़ी की सरकार ने क्या किया? मुसलमानों की गणना हुई है। उनकी हालत क्यों नहीं सुधर रही है? प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में आज दलितों के बाद मुसलमानों की हालत सबसे गरीब है। इस पर कोई बात नहीं कर रहा है। समाज के कई वर्ग सही मायने में पीछे छूट गया है और उसकी संख्या सबसे अधिक है।
जनता को उलझा रही है सरकार
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की महागठबंधन सरकार जनता को उलझा रही है। इन लोगों की मंशा है कि आधे लोग जातीय गणना के पक्ष में और आधे लोग विपक्ष में लग जाएं। ताकि कोई भी पढ़ाई और रोजगार की बात ना करें। नीतीश कुमार चाहते हैं कि एक बार जाति में आग लगाकर अपनी रोटी सेंक कर फिर से मुख्यमंत्री बन जाएं। लेकिन इससे उनको फायदा नहीं होने वाला है। लोकसभा चुनाव में I.N.D.I.A गठबंधन को कोई फायदा नहीं होगा। जेडीयू के पांच एमपी भी नहीं जीतेंगे, ये लिख कर रख लीजिए।
