नई दिल्ली:– आरक्षण को लेकर देश में जारी बहस और विरोध प्रदर्शनों के बीच योगगुरु बाबा रामदेव ने ब्राह्मणों के अपमान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के किसी व्यक्ति का अपमान करना संविधान के खिलाफ माना जाता है, तो ब्राह्मणों का अपमान भी संविधान के खिलाफ होना चाहिए।
मीडिया से बातचीत के दौरान रामदेव ने कहा कि देश में छात्रों, मरीजों, सैनिकों और किसानों समेत अलग-अलग वर्गों के लोगों के साथ अन्याय की स्थिति सामने आती रहती है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति या समुदाय के सम्मान और अधिकारों की रक्षा समान रूप से होनी चाहिए।
लोकतंत्र को बंधक नहीं बनाया जा सकता’
रामदेव ने ‘एक देश, एक चुनाव’ का समर्थन करते हुए कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों से विकास कार्यों और शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ता है। उनके मुताबिक, देश में लगातार चुनाव होने के कारण लोकतांत्रिक गतिविधियां पूरे साल चलती रहती हैं। एक देश, एक चुनाव की व्यवस्था से शिक्षा और विकास की गति को बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि सड़क और संसद में हंगामा या व्यवधान पैदा करके लोकतंत्र को बंधक बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। रामदेव ने यह भी कहा कि नाबालिग बच्चों को आंदोलनों में आगे नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी नागरिक के साथ अन्याय होता है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठानी चाहिए।
‘वंदे मातरम’ को लेकर भी रखी अपनी बात
‘वंदे मातरम’ को लेकर रामदेव ने कहा कि भारत माता उनके लिए आस्था, ज्ञान, शक्ति और भक्ति का केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा को समझने के लिए संस्कृत के मूल अर्थ को समझना जरूरी है।
रामदेव ने कहा कि भारत माता ही उनके लिए ज्ञान, आस्था, मंदिर, पूजा, कर्तव्य, उद्देश्य, मंजिल और धर्म का प्रतीक हैं। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ को भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभावना से जोड़ते हुए कहा कि इसके अर्थ को समझने के लिए भारतीय संस्कृत और संस्कृति का अध्ययन करना चाहिए।
