नई दिल्ली:- रूसी राष्ट्रपति पुतिन इस साल 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने इस बात की पुष्टि की है।
साल 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत कर रहा है, जिसके तहत इस वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी नई दिल्ली द्वारा की जाएगी। एक साल के भीतर पुतिन का यह दूसरा भारत दौरा होगा।
इससे पहले वे दिसंबर 2025 में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आए थे। चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की योजना इस शिखर सम्मेलन के इतर राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है।
गौरतलब है कि इसी महीने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी नई दिल्ली में ब्रिक्स सदस्य देशों के दो दिवसीय विदेश मंत्रियोंके सम्मेलन में भाग लिया था और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी।
वैश्विक मंच पर ब्रिक्स का बढ़ता प्रभाव मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के इस संगठन (ब्रिक्स) का लगातार विस्तार हो रहा है।
साल 2024 में मिस्त्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) इसमें शामिल हुए, जबकि 2025 में इंडोनेशिया इसका हिस्सा बना। वर्तमान में 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का यह समूह वैश्विक मंच पर बेहद शक्तिशाली हो चुका है।
यह दुनिया की कुल आबादी के लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के करीब 26 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
पुतिन की चीन यात्रा
पुतिन मंगलवार से दो दिवसीय चीन यात्रा पर हैं, जहां वे चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात करेंगे। यह यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग दौरे के ठीक एक हफ्ते बाद हो रही है।
क्रेमलिन के अनुसार, दोनों नेता आर्थिक सहयोग और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। यह दौरा 2001 की ‘चीन-रूस मित्रता संधि’ की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रहा है।
2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच चीन, रूस का एक अहम व्यापारिक भागीदार रहा है। चीन इस संघर्ष में खुद को तटस्थ रखता आया है
बीजिंग की कोशिश अमेरिका के साथ स्थिर संबंध बनाए रखने के साथ-साथ रूस के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी अक्षुण्ण रखने की है।
