नई दिल्ली;– चिप्स का पैकेट हो, बिस्किट का डिब्बा हो या कोल्ड ड्रिंक की बोतल, अब तक किसी भी प्रोसेस्ड और पैक्ड फूड में मौजूद शुगर, साल्ट (सोडियम) और सैचुरेटेड फैट की मात्रा जानने के लिए पैकेट के पीछे लिखे बारीक अक्षरों (न्यूट्रिशन लेबल) को पढ़ने की मशक्कत करनी पड़ती थी।
आम उपभोक्ता अक्सर इस तकनीकी जानकारी को समझ नहीं पाते थे और अनजाने में रोजाना शरीर में अत्यधिक शक्कर और नमक का सेवन कर रहे थे। लेकिन अब उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने इस दिशा में एक कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
एफएसएसएआई ने सभी खाद्य निर्माता कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने उत्पादों के मुख्य पृष्ठ पर ही शक्कर, नमक और वसा की मात्रा को बड़े और स्पष्ट अक्षरों में चेतावनी के रूप में प्रदर्शित करें।
क्यों पड़ी इस नियम की जरूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और हृदय संबंधी बीमारियों के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से उछाल आया है। इसका एक प्रमुख कारण दैनिक आहार में प्रोसेस्ड और पैक्ड फूड की बढ़ती खपत है। लोग स्वाद के चक्कर में यह भूल जाते हैं कि पैकेटबंद चीजों में इस्तेमाल होने वाली छिपी हुई शक्कर और अत्यधिक नमक उनके शरीर को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं। बारीक प्रिंट में लिखे होने के कारण उपभोक्ता यह निर्णय नहीं ले पाते थे कि यह उत्पाद उनकी सेहत के लिए सही है या नहीं।
नए बदलाव से क्या होगा फायदा
- आसान और पारदर्शी जानकारी: पैकेट के सामने ही बड़े अक्षरों और स्पष्ट रंगों जैसे रेड वार्निंग या कलर-कोडेड लेबल्स में जानकारी होने से हर वर्ग का व्यक्ति एक नज़र में समझ जाएगा कि उत्पाद में कितना शुगर या नमक है।
- सचेत विकल्प चुनने में मदद: जो लोग डायबिटीज, बीपी या वजन घटाने की समस्या से जूझ रहे हैं, वे खरीदारी करते समय अधिक पौष्टिक और कम शक्कर-नमक वाले विकल्पों को चुन सकेंगे।
- कंपनियों पर नैतिक दबाव: इस नियम के लागू होने के बाद खाद्य कंपनियों पर भी यह दबाव बनेगा कि वे अपने उत्पादों में शक्कर और नमक की मात्रा को नियंत्रित करें ताकि उनका प्रोडक्ट अस्वास्थ्यकर की श्रेणी में न दिखे।
- एफएसएसएआई के फ्रंट आफ पैक लेबलिंग और कलर-कोडेड के तकनीकी मानक
- इजी टू रीड फान्ट और साइज (अक्षरों का आकार): पैकेट के मुख्य भाग पर शक्कर, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा का फॉन्ट साइज सामान्य टेक्स्ट से काफी बड़ा होगा।
- कंट्रास्ट बैकग्राउंड: टेक्स्ट को ऐसे बैकग्राउंड पर लिखा जाएगा जिससे उपभोक्ता को बिना किसी चश्मे या मैग्निफाइंग ग्लास के दूर से ही चेतावनी दिख जाए।
- कलर-कोडेड सिस्टम: यदि किसी खाद्य पदार्थ में निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक शक्कर, नमक या वसा पाई जाती है, तो उस पर लाल रंग का वार्निंग सिंबल देना अनिवार्य होगा।
- अत्यधिक नमक यानि सोडियम होने पर हाई सोडियम कंटेंट होने पर स्पष्ट लाल लेबल।
