नई दिल्ली:– केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज भारत समुद्री बीमा पूल के गठन को मंजूरी दे दी। इस घरेलू बीमा पूल के लिए 12 हजार 980 करोड़ रुपये का एक सॉवरेन गारंटी फंड बनाने का निर्णय लिया गया है। यह फंड समुद्री जोखिमों से निपटने और भारतीय जहाजों को बीमा सुरक्षा कवच के रूप में काम करेगा। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि इस बीमा पूल से भारतीय ध्वज वाले जहाजों और भारत के नियंत्रण वाले जहाजों को किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्रोत से भारतीय बंदरगाहों तक माल लाने और ले जाने के लिए किफायती बीमा की सुविधा सुनिश्चित होगी। अस्थिर समुद्री गलियारों से गुजरने वाले जहाजों को भी यह सुविधा हासिल होगी।
श्री वैष्णव ने कहा कि यह बीमा पूल पतवार और मशीनरी, माल, सुरक्षा और क्षतिपूर्ति तथा युद्ध जोखिम जैसे सभी समुद्री जोखिमों को बीमा सुरक्षा प्रदान करेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह पूल भारतीय जहाजरानी स्थितियों और नियामक आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय स्तर पर देयता बीमा का प्रबंधन करने, भारत के भीतर विशेष समुद्री बीमा, दावा प्रबंधन और कानूनी विशेषज्ञता विकसित करने में सहायक होगा। इस पूल का गठन और कामकाज की देखरेख एक शासी निकाय करेगा। श्री वैष्णव ने कहा कि इससे आत्मनिर्भरता, प्रतिबंधों के प्रति लचीलापन और संप्रभु नियंत्रण को बढावा मिलेगा।
मंत्रिमंडल ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता और पेंशनभोगियों को महंगाई राहत की अतिरिक्त किस्त जारी करने को भी मंजूरी दे दी है। यह इस वर्ष पहली जनवरी से प्रभावी होगी। यह मूल वेतन या पेंशन के मौजूदा 58 प्रतिशत की दर से दो प्रतिशत अधिक है, ताकि मूल्य वृद्धि की भरपाई की जा सके। श्री वैष्णव ने कहा कि महंगाई भत्ता और महंगाई राहत दोनों में वृद्धि के कारण राजकोष पर कुल प्रभाव प्रति वर्ष छह हजार 791 करोड़ रुपये से अधिक होगा। उन्होंने कहा कि इससे 50 लाख से अधिक केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और 68 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को लाभ होगा।
श्री वैष्णव ने कहा कि मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-पीएमजीएसवाई-III को मार्च 2025 के बाद मार्च 2028 तक जारी रखने की भी मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि इसमें बस्तियों को ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों से जोड़ने वाले मुख्य मार्गों और प्रमुख ग्रामीण संपर्कों का समेकन शामिल है। उन्होंने बताया कि योजना का संशोधित परिव्यय 83 हजार 977 करोड़ रुपये होगा। मंत्रिमंडल ने मैदानी क्षेत्रों में सड़कों और पुलों के निर्माण की समय सीमा मार्च 2028 तक और पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण की समय सीमा मार्च 2029 तक बढ़ाने को भी मंजूरी दी। श्री वैष्णव ने कहा कि पीएमजीएसवाई-III की समयसीमा बढ़ाने से ग्रामीण सड़कों के लक्षित उन्नयन को सुनिश्चित करते हुए इसके इच्छित सामाजिक-आर्थिक लाभों की पूर्ण प्राप्ति हो सकेगी।
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आज 24 हजार 815 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी। श्री वैष्णव ने बताया कि ये परियोजनाएं गाजियाबाद-सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन और राजामुंद्री (निदादवोलू)-विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) तीसरी और चौथी लाइन हैं। उन्होंने कहा कि यह उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के 15 जिलों को सम्मिलित करती है। श्री वैष्णव ने कहा कि बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने में सहायक होंगे।
