नई दिल्ली :– भारत और वियतनाम के बीच प्रस्तावित ब्रह्मोस मिसाइल डील ने दक्षिण चीन सागर में रणनीतिक हलचल बढ़ा दी है और चीन की चिंताएं भी तेज कर दी हैं। वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम के भारत दौरे के बाद विदेश मंत्रालय के “वॉच दिस स्पेस” बयान ने संकेत दिया है कि इस दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है, हालांकि किसी आधिकारिक समझौते की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह डील होती है तो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। वियतनाम लंबे समय से दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय विवादों को लेकर सतर्क रहा है और अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
ऐसे में भारत के साथ संभावित रक्षा सहयोग को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। भारत और वियतनाम के बीच संबंध हाल के वर्षों में रक्षा, प्रशिक्षण और संयुक्त सैन्य अभ्यास तक विस्तारित हुए हैं, जिससे दोनों देशों की साझेदारी मजबूत हुई है। ब्रह्मोस मिसाइल, जिसे भारत और रूस ने मिलकर विकसित किया है, अपनी उच्च गति और सटीकता के लिए जानी जाती है, लेकिन इसकी आपूर्ति से जुड़ा कोई भी फैसला आधिकारिक पुष्टि और अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं के अधीन होगा।
विश्लेषकों के अनुसार, यह संभावित समझौता भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा निर्यात नीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, जैसा कि पहले फिलीपींस के साथ हुए समझौते में देखा गया था। फिलहाल, इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय और औपचारिक घोषणा का इंतजार है।
