छत्तीसगढ़:- शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार योजनाएं चला रही है, लेकिन बिलाईगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत चारपाली के आश्रित ग्राम रनकोट में प्राथमिक स्कूल की स्थिति इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. यहां करीब 35 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन जर्जर स्कूल भवन, जमीन पर बैठकर पढ़ाई और शिक्षकों की कथित अनियमित उपस्थिति ने पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी है.
सोमवार दोपहर करीब 12 बजे जी न्यूज की टीम टीम रनकोट प्राथमिक शाला पहुंची, तो मौके पर कोई भी शिक्षक मौजूद नहीं मिला. स्कूल परिसर में बच्चे खुद अपनी-अपनी पढ़ाई करते नजर आए. बताया गया कि बच्चों को खाना खाने के बाद घर जाने के लिए कह दिया गया था. स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल में ऐसी स्थिति केवल एक दिन की नहीं है, बल्कि यह सिलसिला लगभग रोजाना देखने को मिलता है.
जर्जर कमरों में कैद बेंच-डेस्क
बता दें कि स्कूल भवन में दो कमरे हैं, लेकिन दोनों की स्थिति जर्जर बताई जा रही है. दीवारों में दरारें हैं और छत का प्लास्टर गिरने की स्थिति बनी हुई है. बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें कमरों के बजाय बरामदे में जमीन पर बैठकर पढ़ाया जा रहा है. विडंबना यह है कि बच्चों के बैठने के लिए उपलब्ध बेंच-डेस्क जर्जर कमरों के अंदर पड़े हैं, लेकिन बच्चे उनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं. बारिश और खराब मौसम के दौरान बरामदे में जमीन पर बैठकर पढ़ना बच्चों के लिए और भी परेशानी भरा हो जाता है.
शिक्षक अपने मन से आते हैं-ग्रामीण
वहीं जी न्यूज के कैमरे पर ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि स्कूल में शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि, शिक्षक अपने मन से आते हैं और अपने मन से चले जाते हैं. ग्रामीणों ने रतन कुर्रे नाम के शिक्षक की उपस्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि रतन कुर्रे शिक्षक साल में एक-दो बार ही स्कूल आते हैं और कई बच्चों ने उन्हें लंबे समय से स्कूल में देखा तक नहीं है. ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की स्थिति को लेकर कई बार ध्यान दिलाने के बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया गया है.
सरकार से अभिभावकों की अपील
अभिभावकों का कहना है कि शिक्षक तो फिलहाल नहीं आ रहे हैं. पहले भी कई-कई दिन तक शिक्षक स्कूल नहीं आते थे. अभी शिक्षक आ रहे हैं, लेकिन आज भी शिक्षक स्कूल में नहीं थे. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि शिक्षक आते हैं और चले जाते हैं. कई बार करीब 10-11 बजे ही चले जाते हैं और कई दिनों तक आते भी नहीं हैं. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. बच्चे कई बार खुद ही पढ़ने को मजबूर हैं. उन्होंने बताया कि हमने शिक्षक की कमी को लेकर शिकायत भी की है और मांग कर रहे हैं कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक भेजे जाएं. बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है. सरकार और शिक्षा विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए.
किसकी निगरानी में चल रहा स्कूल?
पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की मैदानी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि शिक्षक लंबे समय से अनुपस्थित हैं, तो उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज हो रही है. वेतन का सत्यापन कौन कर रहा है? संकुल समन्वयक और बीईओ द्वारा स्कूल का निरीक्षण कब किया गया? सबसे बड़ा सवाल यह भी है? कि क्या लंबे समय से कथित रूप से अनुपस्थित रहने वाले शिक्षक को विभागीय कार्रवाई का कोई भय नहीं है. ग्रामीणों के आरोपों और मौके की स्थिति ने शिक्षा विभाग के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
