मध्यप्रदेश:- भारतीय जनता पार्टी ने अभी से चुनावी तैयारियां शुरू कर दी है. राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया गया है. वसुंधरा राजे और राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि स्मृति ईरानी को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं मध्य प्रदेश के 6 बड़े नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. इनमें लाल सिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, गजेंद्र पटेल को राष्ट्रीय महामंत्री और कविता पाटीदार को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है.
बता दें कि एमपी की राजनीति में लाल सिंह आर्य की पहचान बीजेपी के बड़े दलित नेताओं में होती है. भिंड जिले के गोहद से उन्होंने राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. लाल सिंह आर्य 2013 से 2018 तक विधायक भी रहे हैं. वहीं संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे लाल सिंह आर्य को 2020 से बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिली हुई है. अब राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद बीजेपी में उनका कद और भी बढ़ गया है. इसके अलावा, विष्णु दत्त शर्मा को प्रकोष्ठ संकुल संयोजक, बंशीलाल गुर्जर को किसान मोर्चा अध्यक्ष और आशीष उषा अग्रवाल को मीडिया सह संयोजक बनाया गया है.
कौन हैं लाल सिंह आर्य?
दरअसल, लाल सिंह आर्य का जन्म 15 जून 1964 को भिंड में हुआ. उन्होंने पढ़ाई में बीए और एलएलबी की डिग्री ली है. बचपन से ही संघ और बीजेपी से जुड़ाव रहा. धीरे-धीरे गांव-कस्बे की राजनीति से आगे बढ़कर उन्होंने युवा मोर्चा और एससी मोर्चा की जिम्मेदारी संभाली. सन 1998 में पहली बार गोहद की एससी सीट से विधायक बने. इसके बाद 2003 में फिर जीत दर्ज की. 2008 में हार मिली, लेकिन 2013 में उन्होंने वापसी करते हुए गोहद से दोबारा चुनाव जीत लिया.
तीन बार बने विधायक
बता दें कि 2013 में विधायक बनने के बाद लाल सिंह आर्य को मध्य प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया. उनके पास नर्मदा घाटी विकास, सामान्य प्रशासन, विमानन, जनजातीय कार्य और अनुसूचित जाति कल्याण जैसे विभाग रहे. इसके बाद संगठन में उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई. साल 2020 से वे भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. एक बार फिर से उन्होंने 2023 में गोहद से चुनाव लड़ा, लेकिन एक बार फिर से हार गए. इसके बावजूद भी बीजेपी ने संगठन में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है.
कौन हैं गजेंद्र पटेल?
2024 के लोकसभा चुनाव में एमपी की खरगौन लोकसभा सीट से बीजेपी नेता गजेंद्र पटेल ने लगभग 1 लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी. गजेन्द्र पटेल ने बड़वानी लोकसभा सीट से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है. गजेंद्र पटेल खरगौन में एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं. अगर उनके राजनीतिक करियर के बारे में बात करें तो वह पहले संघ के प्रचारक भी रह चुके हैं. इंदौर के महू में उन्होंने संघ के विस्तारक के तौर पर काम किया था. वह शिक्षा मंत्री भी रह चुके हैं और फिलहाल बीजेपी अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं.
कौन हैं कविता पाटीदार?
नितिन नवीन की नई टीम में एमपी की कविता पाटीदार को भी राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी दी गयी है. दरअसल, कविता पाटीदार का जन्म साल 1974 में इंदौर में हुआ था. कविता पाटीदार ने अपने करियर की शुरुआत बीजेपी संगठन के माध्यम से की थी. मई 2022 में बीजेपी ने उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार भी बनाया. इससे पहले इंदौर जिला पंचायत की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. हालांकि, अभी उनका राज्यसभा कार्यकाल 30 जून 2022 से 29 जून 2028 तक का है.
इन चेहरों के क्या है सियासी मायने
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में एमपी के 6 बड़े चेहरों को शामिल किया है. इनमें इन तीन बड़े चेहरों को शामिल करना सीधे तौर पर प्रदेश की जमीन जुड़ा संदेश माना जा रहा है. क्योंकि पार्टी ने अनुभव के साथ जातीय समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन को साधने की भी कोशिश की है. इससे साफ पता चल रहा है कि भोपाल से लेकर मालवा-निमाड़ तक जिन बड़े नेताओं की पकड़ मजबूत है, उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी है. बात करते हैं लाल सिंह आर्य की तो बीजेपी ने इनके जरिए दलित समाज को साधने की कोशिश की है.
दलित वोट बैंक पर भी रखा फोकस
बता दें कि लाल सिंह आर्य लंबे समय से संगठन और राजनीति में सक्रिय रहे हैं. SC मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की भी कमान संभाल चुके हैं. ऐसे में उनकी मौजूदगी सिर्फ एक नेता को पद देने भर की बात नहीं है, बल्कि दलित वोटबैंक तक संगठन की पहुंच बहुत मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है. खासकर ग्वालियर-चंबल की जमीन पर इसका असर देखा जा सकता है, जहां सामाजिक समीकरण चुनाव में काफी मायने रखते हैं. गांव-गांव तक संगठन का संदेश पहुंचाने में लाल सिंह आर्य की अहम भूमिका हो सकती है.
इलाकों को साधने की कोशिश
मध्य प्रदेश के इन चेहरों को बीजेपी में जगह मिलना सिर्फ सम्मान ही नहीं, बल्कि आगे की सियासी तैयारी भी मानी जा सकती है. क्योंकि दतिया उपचुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी एक्शन मोड में नजर आ रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए जातीय समीकरण को साधने के लिए बीजेपी ने प्रदेश के 6 चेहरों को जगह दी है. बीजेपी ने एक तरफ एससी, एसटी और ओबीसी समीकरण को एक साथ रखने की कोशिश की है, तो दूसरी तरफ मालवा-निमाड़ और ग्वालियर-चंबल जैसे इलाकों में संतुलन बनाए रखने के लिए भी यह कदम उठाया है.
