नई दिल्ली:- स्कूल में बच्चे सिर्फ किताबी ज्ञान या सवालों के जवाब नहीं सीखते। बच्चों का रोजाना स्कूल जाना उन्हें दूसरों के साथ व्यवहार करना, अपनी बात को गरिमा के साथ रखना, गलतियों से सीखना और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना भी सिखाते हैं। इन आदतों को विकसित करने में माता-पिता के साथ शिक्षक की भी बड़ी भूमिका होती है।
एक अच्छा शिक्षक सिर्फ यह नहीं देखता कि बच्चा परीक्षा में कितने नंबर ला रहा है, बल्कि यह भी समझने की कोशिश करता है कि वह आगे चलकर एक जिम्मेदार और सेल्फ डिपेंडेंट इंसान कैसे बनेगा।
अपनी बात सही तरीके से रखना
क्लास में सवाल पूछना, अपनी राय बताना या किसी बात से असहमत होने पर भी अपनी बात सम्मान के साथ रखना एक शिक्षक ही बच्चों को सिखाती है, जो बच्चों के जीवन के लिए लाइफ लर्निंग स्किल है। शिक्षक जब बच्चों को बिना झिझक बोलने का मौका देते हैं, तो उनमें धीरे-धीरे कॉन्फिडेंस बढ़ता है। यही कॉन्फिडेंस उन्हें आगे चलकर जीवन की राह में काम आते हैं।
समय की अहमियत समझना
होमवर्क समय पर पूरा करना, प्रोजेक्ट की डेडलाइन याद रखना और अलग-अलग एक्टिविटी के बीच समय बांटना बच्चों को टाइम मैनेजमेंट सिखाता है। शिक्षक बच्चों को छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देते हैं, जिनसे उनमें यह आदत विकसित होते है। बच्चा समझने लगता है कि हर काम आखिरी समय पर करने के बजाय पहले से योजना बनाकर करना आसान होता है।
हार और गलती से सीखना
हर परीक्षा में अच्छे नंबर आना या हर प्रतियोगिता में जीत जरूरी नहीं है। शिक्षक ही बच्चों को यह समझाने में अहम भूमिका निभाते हैं कि गलती या असफलता का मतलब अंत नहीं है। गलत उत्तर को सिर्फ गलत बताने के बजाय उसकी वजह समझाना और दोबारा कोशिश करने के लिए प्रेरित करना बच्चे में मुश्किल के बाद दोबारा प्रयास करने की क्षमता डेवलप करता है।
दूसरों के साथ मिलकर काम करना
ग्रुप प्रोजेक्ट, गेम्स और क्लास की एक्टिविटी बच्चों को टीमवर्क समझाती हैं। इसमें उन्हें अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ दूसरों की बातें सुनना भी सीखाती है। शिक्षक बच्चों को मिलकर काम करने के मौके देकर उनमें सहयोग, धैर्य और दूसरों के विचारों का सम्मान करना सिखाती है।
समस्या का समाधान ढूंढना
बच्चों को हर छोटी परेशानी का तुरंत जवाब दे देना आसान है, लेकिन उन्हें उनकी समस्या का समाधान स्वंय ढुंढने देना उनके जीवन के लिए अधिक उपयोगी हो सकता है। शिक्षक किसी सवाल के जरिए बच्चों को अलग-अलग संभावनाओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे उनमें प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल डेवलप होता है। जीवन में आगे चलकर मुश्किल परिस्थितियों में घबराने के बजाय वे समाधान तलाशने की कोशिश करते हैं।
जिम्मेदारी लेना
क्लास की छोटी जिम्मेदारियां जैसे किताबें व्यवस्थित करना, बोर्ड साफ करना, ग्रुप को लीड करना या किसी प्रोजेक्ट में अपनी भूमिका पूरी करना बच्चों को जिम्मेदारी लेना सिखाता है। जब बच्चे को उसकी जिम्मेदारी पर भरोसा दिया जाता है, तो उसमें आत्मनिर्भरता और अपने काम के प्रति गंभीरता और सजगता बढ़ती है।
दूसरों की भावनाओं को समझना
अच्छी शिक्षा सिर्फ खुद आगे बढ़ना नहीं सिखाती, बल्कि दूसरों को भी अपने साथ आगे लेकर चलना भी सिखाती है। किसी क्लासमेट का मजाक उड़ाने के बजाय उसकी मदद करना, किसी नए बच्चे को ग्रुप में शामिल करना या किसी के साथ किसी बात पर असहमति होने के बावजूद सम्मान बनाए रखना इमोशनल इंटेलीजेंस का हिस्सा है।
